
रायपुर । जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय में 17 जनवरी को हुए भीषण अग्निकांड की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट अब तक शासन को नहीं सौंपी गई है। जबकि शासन और लोक शिक्षण संचालनालय ने समिति को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वह पांच दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे। घटना के सात दिन बीत जाने के बावजूद रिपोर्ट का सामने न आना अब पूरे मामले को और संदिग्ध बना रहा है।
तय समय सीमा के बाद भी रिपोर्ट नदारद
अग्निकांड की घटना के अगले ही दिन, यानी 18 जनवरी को शासन द्वारा जांच समिति का गठन किया गया था। समिति को 23 जनवरी तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन 25 जनवरी तक भी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। इस देरी ने न सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि जांच की निष्पक्षता को लेकर भी शंकाएं पैदा कर दी हैं।
जांच से पहले ही इमारत जमींदोज
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल डीईओ कार्यालय की पुरानी इमारत को लेकर उठ रहा है। जिस भवन में आग लगी थी, उसे 19 जनवरी की सुबह बुलडोजर से पूरी तरह गिरा दिया गया। हैरानी की बात यह है कि जांच समिति उसी दिन दोपहर करीब तीन बजे घटनास्थल पर पहुंची, लेकिन तब तक पूरी इमारत ढह चुकी थी। ऐसे में आग लगने के कारणों से जुड़े अहम भौतिक साक्ष्य पहले ही नष्ट हो चुके थे।
सिर्फ औपचारिक निरीक्षण का आरोप
छात्र संगठन एनएसयूआई ने जांच समिति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का कहना है कि समिति के सदस्यों ने घटनास्थल पर केवल औपचारिक निरीक्षण किया और बिना किसी गहन जांच के वापस लौट गए। इसके बाद समिति ने डीईओ कार्यालय से कागजी जानकारी जुटाकर जांच आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की, जो किसी भी गंभीर मामले में पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।
मलबा हटने से साक्ष्य नष्ट होने की आशंका
अब स्थिति यह है कि जमींदोज की गई इमारत का मलबा भी धीरे-धीरे हटाया जा रहा है। इससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि अग्निकांड से जुड़े भौतिक साक्ष्य पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे। विपक्षी दलों और संगठनों का आरोप है कि यह सब जानबूझकर किया गया, ताकि जांच किसी निष्कर्ष तक न पहुंच सके।
23 अलमारियां जलकर खाक, अहम दस्तावेज नष्ट
अग्निकांड में डीईओ कार्यालय की 23 अलमारियां पूरी तरह जलकर खाक हो गईं। इन अलमारियों में छात्रवृत्ति, मध्यान्ह भोजन योजना, अनुकंपा नियुक्ति, स्थापना शाखा, स्कूल मान्यता और अनुदान से जुड़े कई महत्वपूर्ण शासकीय दस्तावेज रखे हुए थे। इन दस्तावेजों के नष्ट होने से न केवल प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुआ है, बल्कि संभावित अनियमितताओं की जांच भी कठिन हो गई है।
एसआईटी जांच की मांग तेज
इस पूरे मामले को लेकर शालेय शिक्षक संघ और कांग्रेस पार्टी ने एसआईटी (विशेष जांच दल) से जांच कराने की मांग तेज कर दी है। संगठनों का आरोप है कि जांच समिति की निष्क्रियता और इमारत को जल्दबाजी में गिराया जाना पूरे मामले को संदिग्ध बनाता है। वहीं, एनएसयूआई ने डीईओ कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन कर निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है।
प्रशासन का पक्ष: जांच जारी
वहीं जांच समिति के अध्यक्ष संजीव श्रीवास्तव ने कहा कि डीईओ कार्यालय में हुए अग्निकांड को लेकर प्रशासनिक जांच अभी जारी है। इस स्तर पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर ही रिपोर्ट तैयार की जाएगी। समिति के साथ फॉरेंसिक टीम भी घटनास्थल से जुड़े तथ्यों की जांच करेगी।
बढ़ता जा रहा है राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव
कुल मिलाकर, डीईओ कार्यालय अग्निकांड की जांच में हो रही देरी, साक्ष्यों का नष्ट होना और रिपोर्ट का समय पर न आना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि जांच रिपोर्ट कब तक सामने आती है और क्या इससे आग लगने के असली कारणों का खुलासा हो पाता है या नहीं।




