अधिकारियों ने कर दिया 20 लाख का घास घोटाला
रायगढ़ । डीएमएफ की राशि में बीते तीन सालों में लूट मचा दी गई। जिन कामों का कोई औचित्य नहीं ऐसी स्वीकृति दे दी गई। अफसरों ने मवेशियों के घास के नाम पर भी राशि डकार ली। गोठानों में घास उगाने के लिए दी गई रकम एक प्राइवेट फर्म के जरिए अफसरों ने हजम कर ली। जिस तरीके से रायगढ़ जिले में डीएमएफ फंड को खर्च किया गया, यह बेहद चौंकाने वाला है। मनमाने तरीके से ऐसे कामों के लिए मंजूरी दी गई जिसमें भ्रष्टाचार का पटकथा पहले ही तैयार कर ली गई थी।
अब जो मामला आया है उसमें अधिकारियों ने मवेशियों के लिए घास उगाने के नाम पर 20 लाख रुपए का घोटाला कर दिया। वर्ष 21-22 में जिले के 389 गोठानों में चारागाह विकास के लिए हाईब्रिड नेपियर रूट सप्लाई करने की मंजूरी दी गई। इसके लिए डीएमएफ से 22,21,968 रुपए उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं को देने की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई।
इसमें से 19,99,771 रुपए पशुपालन विभाग को दे दिए गए। राशि से नेपियर रूट खरीदकर गौठानों में लगाना था, ताकि मवेशियों के लिए चारागाह बन सके। उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं आरएच पांडेय ने इस राशि को 150 गोठान संचालन समिति को बांट दिए। विभाग ने ही सभी गोठानों को कह दिया कि यह राशि भिलाई की एक फर्म शरण साइलेज फाम्र्स प्रालि को भुगतान कर दें। अनौपचारिक रूप से इस फर्म का चयन राशि आवंटन के पूर्व ही कर दिया गया था।
अब इन गोठानों में देखें तो पता चलेगा कि नेपियर रूट का नामोनिशान तक नहीं है। मतलब योजना बनाकर डीएमएफ की राशि में घपला किया गया।डेढ़ रुपए की दर से एक रूटउप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं को 389 गौठानों में नेपियर रूट सप्लाई के लिए राशि दी गई थी। शरण साइलेज फाम्र्स जुनवानी भिलाई को इसके लिए अधिकृत भी कर दिया। गड़बड़ी पकड़ में न आए इसके लिए 150 गौठानों को 19,99,650 रुपए बांट दिए गए। वहां से फर्म को राशि भुगतान कर दी गई। डेढ़ रुपए की दर से 13,33,100 नेपियर रूट भेजने का दावा किया गया है जो सरासर झूठ है।
वर्तमान में इन गोठानों में घास तो क्या उसके ठूंठ भी नहीं मिलेंगे।डीएमएफ की राशि को गबन करने के लिए जो तरीका अपनाया गया, वह कमाल है। पहले एक विभाग चुनकर उसे राशि आवंटित कर दी। यह काम उद्यानिकी विभाग का है लेकिन पशु चिकित्सा विभाग को दिया गया। फिर विभाग को कहा गया कि आपको सीधे खरीदी नहीं करनी है बल्कि गोठानों को राशि आवंटित करनी है। इसके बाद खरसिया के 10, घरघोड़ा के 10, पुसौर के 18, बरमकेला के 36, धरमजयगढ़ के 38 और सारंगढ़ के 38 गोठानों में नेपियर रूट की खरीदी करवाई गई। रायगढ़, तमनार और लैलूंगा के गोठानों को बाद में राशि आवंटित की जानी थी लेकिन अफसरों के तबादले हो गए।