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अवैध रेत खनन पर एनजीटी की सख्ती : अफसरों की भूमिका जांच के घेरे में, गिर सकती है गाज

रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अवैध रेत खनन और खनिजों के गैरकानूनी परिवहन के मामलों ने अब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) का ध्यान खींच लिया है। लंबे समय से चल रही शिकायतों और आधी-अधूरी कार्रवाई को देखते हुए एनजीटी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जिला स्तर पर नियमों का पालन नहीं किया जा रहा और जिम्मेदार अधिकारी अपनी भूमिका निभाने में असफल रहे हैं।

एनजीटी के निर्देश के बाद अब इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की जाएगी। जांच की जिम्मेदारी रायपुर जिला मजिस्ट्रेट और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (सीईसीबी) के प्रतिनिधियों को संयुक्त रूप से सौंपी गई है। दोनों एजेंसियों को 42 दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर एनजीटी की केंद्रीय पीठ, भोपाल को सौंपनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।

जिला खनिज विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार पिछले एक वर्ष में रेत, मुरुम, गिट्टी और फर्शी पत्थर के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण से जुड़े 1,132 मामलों में वाहन पकड़े गए। इसके अलावा पोकलेन और चेन माउंटेन जैसी करीब 40 भारी मशीनें भी जब्त की गईं। इन सभी प्रकरणों में कुल 3 करोड़ 85 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया, लेकिन एनजीटी का मानना है कि यह कार्रवाई सिर्फ दिखावटी रही। अधिकरण ने टिप्पणी की कि अधिकतर मामलों में मौके पर ही अर्थदंड वसूल कर फाइल बंद कर दी गई, जबकि गंभीर मामलों को न तो एनजीटी तक भेजा गया और न ही दोषियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए। इससे यह स्पष्ट होता है कि वास्तविक खनन माफिया पर कोई ठोस असर नहीं पड़ा।

एनजीटी की पीठ, जिसमें न्यायिक सदस्य श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल शामिल थे,  इस लापरवाही को गंभीर प्रशासनिक चूक बताया। पीठ ने यह भी कहा कि अवैध रेत खनन सिर्फ राजस्व हानि का मामला नहीं है, बल्कि यह नदी तंत्र, भूजल स्तर और पर्यावरण संतुलन के लिए बड़ा खतरा है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जिला खनिज विभाग को कई मामलों की जानकारी होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने प्रभावी कदम नहीं उठाए। इसी कारण सीईसीबी के सदस्य सचिव, खनिज विभाग के उप निदेशक (छत्तीसगढ़) और जिला खनन अधिकारी रायपुर को इस मामले में प्रतिवादी बनाया गया है।

एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि नियमों के तहत स्वीकृत क्षेत्र से बाहर खनन, नदी के प्रवाह में हस्तक्षेप, भारी मशीनों का उपयोग और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने जैसे मामलों में एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। अवैध खनन के मामलों में दो से पांच साल तक की सजा और न्यूनतम पांच लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त पर्यावरणीय क्षति के लिए अलग से भारी मुआवजा भी लगाया जा सकता है।हरदीडीह एनीकट से जुड़ा मामला भी जांच के दायरे में है, जहां गेट खोलकर बार-बार अवैध खनन किए जाने के आरोप सामने आए थे। यहां प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई अधूरी रहने के आरोपों ने भी प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।

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