छत्तीसगढ़

शिक्षकों की छुट्टी पर बैन: 15 फरवरी से शिक्षकों पर एस्मा होगा लागू, ढाई महीने तक ड्यूटी पर रहना होगा तैनात, जानिए क्या है सरकार का सख्त आदेश?

छत्तीसगढ़ : छत्तीसगढ़ में आगामी बोर्ड परीक्षाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने कड़ा लेकिन अहम निर्णय लिया है। प्रदेश में एसेंशियल सर्विस एंड मेंटेनेंस एक्ट, यानी ESMA लागू कर दिया गया है। इस निर्णय का सीधा असर शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों पर पड़ेगा। सरकार के आदेश के मुताबिक, परीक्षा अवधि के दौरान न तो छुट्टियां स्वीकृत की जाएंगी, न कोई आंदोलन किया जा सकेगा और न ही परीक्षा ड्यूटी से इनकार किया जा सकेगा।

माध्यमिक शिक्षा मंडल, छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं फरवरी माह से प्रारंभ हो रही हैं, जबकि पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षाएं मार्च से आयोजित की जाएंगी। लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी इन परीक्षाओं को लेकर शासन किसी भी प्रकार का व्यवधान नहीं चाहता। इसी को ध्यान में रखते हुए 15 फरवरी से 30 अप्रैल तक के लिए ESMA लागू करने का आदेश जारी किया गया है।

सरकारी आदेश के अनुसार यह प्रतिबंध न केवल परीक्षा आयोजन की अवधि तक, बल्कि मूल्यांकन कार्य समाप्त होने तक प्रभावी रहेगा। यानी लगभग तीन महीने तक शिक्षक और परीक्षा से जुड़े कर्मचारी किसी भी प्रकार की छुट्टी नहीं ले सकेंगे। इसके साथ ही वे किसी आंदोलन, हड़ताल या सामूहिक अवकाश का सहारा भी नहीं ले पाएंगे। यदि कोई शिक्षक या कर्मचारी परीक्षा ड्यूटी से इनकार करता है, तो इसे कानून का उल्लंघन माना जाएगा।

जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि लोकहित में यह अत्यंत आवश्यक है कि माध्यमिक शिक्षा मंडल, छत्तीसगढ़ की परीक्षाओं से संबंधित अत्यावश्यक सेवाओं में किसी भी प्रकार की बाधा न उत्पन्न हो। इसलिए परीक्षा से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा कार्य से इनकार किए जाने पर प्रतिषेध लगाया गया है। यह आदेश छत्तीसगढ़ अत्यावश्यक सेवा संधारण तथा विच्छिन्नता निवारण अधिनियम, 1979 के तहत जारी किया गया है।

सरकार का मानना है कि बोर्ड परीक्षाएं राज्य की सबसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक गतिविधियों में से एक हैं। इनमें जरा-सी लापरवाही या अव्यवस्था लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है। इसी कारण शिक्षकों की भूमिका को अत्यावश्यक सेवा की श्रेणी में रखा गया है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि परीक्षा संचालन, उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन और परिणाम से जुड़ा हर कार्य अत्यावश्यक सेवा के अंतर्गत आएगा।

जानिए ESMA क्या है

छत्तीसगढ़ अत्यावश्यक सेवा संधारण तथा विच्छिन्नता निवारण अधिनियम, 1979 के अंतर्गत ESMA लागू होने पर अत्यावश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारी कार्य से इनकार नहीं कर सकते। अधिनियम की धारा 4 की उपधारा (1) के तहत कोई भी व्यक्ति, जो अत्यावश्यक सेवा से संबंधित है, पूर्ण या आंशिक कार्य विराम, हड़ताल या किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं कर सकता। इस अधिनियम का उल्लंघन दंडनीय अपराध माना जाता है, जिसमें कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

सरकार के इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग में हलचल है। जहां एक ओर शासन इसे छात्रों के हित में जरूरी कदम बता रहा है, वहीं शिक्षक संगठनों में इसे लेकर असंतोष भी देखा जा रहा है। हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि बोर्ड परीक्षाओं के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ में बोर्ड परीक्षाओं को निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि ESMA के तहत परीक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती है और इसका शिक्षकों व विद्यार्थियों पर क्या असर पड़ता है।

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