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15 मार्च को रायपुर में बड़ी बैठक, टेट की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक संगठनों की लामबंदी

रायपुर। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर देशभर में शिक्षकों के बीच चिंता बढ़ती जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ में भी शिक्षक संगठन सक्रिय हो गए हैं। प्रदेश के विभिन्न शिक्षक संगठनों ने इस विषय पर आगे की रणनीति तय करने के लिए 15 मार्च को राजधानी रायपुर में एक बड़ी बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। इस बैठक में प्रदेशभर के शैक्षिक संगठनों के पदाधिकारियों और टीईटी से प्रभावित शिक्षकों को आमंत्रित किया गया है।

शिक्षक संगठनों के मुताबिक हाल ही में इस विषय पर देश की राजधानी नई दिल्ली में भी एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इस बैठक में टीईटी की अनिवार्यता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हुए शिक्षकों की समस्याओं और भविष्य को लेकर चिंता जताई गई थी। इस बैठक में छत्तीसगढ़ से शिक्षक एवं कर्मचारी नेता केदार जैन, मनीष मिश्रा और रविन्द्र राठौर ने हिस्सा लिया था।

नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी इस मुद्दे को लेकर आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने की तैयारी की जा रही है। इसी सिलसिले में 15 मार्च को रायपुर में प्रदेशस्तरीय बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में प्रदेश के सभी प्रमुख शैक्षिक संगठनों के प्रदेश अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्ष, प्रदेश, जिला और ब्लॉक स्तर के पदाधिकारी तथा टीईटी से प्रभावित शिक्षक शामिल होंगे।

टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और छत्तीसगढ़ प्रदेश संयुक्त शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष केदार जैन, छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक एवं समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश संयोजक मनीष मिश्रा, शिक्षक नेता रविन्द्र राठौर तथा छत्तीसगढ़ जागरूक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष जाकेश साहू ने प्रदेश के सभी शैक्षिक संगठनों से इस बैठक में भाग लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह बैठक शिक्षकों के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे पर सामूहिक निर्णय लेने के लिए आयोजित की जा रही है।

शिक्षक नेताओं का कहना है कि टीईटी की अनिवार्यता के कारण बड़ी संख्या में शिक्षकों के सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बन गई है। उनका दावा है कि छत्तीसगढ़ में लगभग 80 हजार शिक्षक इस निर्णय से प्रभावित हो सकते हैं, जबकि पूरे देश में यह संख्या करीब 20 लाख से अधिक बताई जा रही है।

शिक्षक संगठनों का मानना है कि यदि इस विषय पर समय रहते ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो बड़ी संख्या में शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए सभी संगठनों को एक मंच पर लाकर आगे की रणनीति तैयार करने की आवश्यकता है।

जानकारी के अनुसार यह बैठक 15 मार्च, रविवार को दोपहर 12 बजे रायपुर के शंकर नगर स्थित छत्तीसगढ़ राजपत्रित कर्मचारी अधिकारी संघ के कार्यालय में आयोजित की जाएगी। बैठक में टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ आगे की आंदोलनात्मक रणनीति, सरकार से बातचीत और शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। शिक्षक नेताओं ने प्रदेशभर के शिक्षकों और संगठन प्रतिनिधियों से इस बैठक में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।

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