
खरोरा। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसले में स्पष्ट कर दिया कि अगर कोई शख्स हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म से बाहर जाकर धर्म परिवर्तन करता है, तो उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता। दुरुपयोग की चिंता तब हाईकोर्ट ने कहा था कि धर्म परिवर्तन के बाद भी SC कम्युनिटी को मिलने वाले फायदे लेते रहना संविधान के साथ धोखा है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के पास इस तरह की कई शिकायतें हैं और उसने पिछले साल देशभर में जांच भी शुरू की थी। कुल मिलाकर मंशा यह है कि संविधान के तहत मिले अधिकार का दुरुपयोग न होने पाए। साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा धर्मान्तरण कानून बना के छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जाति वर्ग को सही में आरक्षण का लाभ मिले तथा हिन्दू समाज में जागरूकता एकता को पर मिल का पत्थर साबित होगा नगर पंचायत खरोरा के पूर्व अध्यक्ष व सांसद प्रतिनिधि अनिल सोनी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए, साथ ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है और कहा कि इस फैसले से हिंदू समाज और सनातन को ताकत और एकता को बल मिलेगा एवं हिंदू समाज के अनुसूचित जाति समाज को इससे फायदा मिलेगा, अब इन समाजों से जड़े लोगों की भी जिम्मेदारी है कि धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्तियों की पहचान कर इनका पर्दाफाश किया जाए जिससे सनातन धर्म को इस कैंसर जैसी सामाजिक बीमारी से बचाया जा सके।



