
करंट से मजदूर की मौत…रेलवे-अफसरों को HC से फटकार, DRM-दफ्तर के बाहर परिजनों ने प्रदर्शन की दी चेतावनी..
बिलासपुर। रेलवे कोचिंग यार्ड में वंदे भारत एक्सप्रेस के एक्स्ट्रा कोच की सफाई और मरम्मत के दौरान करंट की चपेट में आए ठेका श्रमिक प्रताप बर्मन की गुरुवार को मौत हो गई। घटना के बाद से परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। वे डीआरएम ऑफिस के बाहर धरना पर बैठ गए हैं और मुआवजा, नौकरी व बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी लेने की मांग कर रहे हैं।
इस मामले पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने सुनवाई करते हुए रेलवे के रवैये पर सख्त नाराजगी जताई। कोर्ट ने एस-ईसीआर के जीएम और डीआरएम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जोड़ा और तीन दिन के भीतर शपथपत्र के साथ पूरी जानकारी पेश करने के निर्देश दिए। इसमें हादसे की पूरी जानकारी, इलाज और मुआवजे का ब्योरा तथा ठेकेदार पर की गई कार्रवाई का उल्लेख करना होगा। अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी।
कैसे हुआ हादसा
जांजगीर-चांपा जिले के मुलमुला निवासी प्रताप बर्मन रेलवे में ठेका श्रमिक था। 23 अगस्त को वह वंदे भारत एक्सप्रेस के कोच की मरम्मत करते समय OHE तार की चपेट में आ गया। परिवार का आरोप है कि बिजली सप्लाई बंद किए बिना ही उसे कोच पर चढ़ा दिया गया, जिसके चलते यह हादसा हुआ।
हाईकोर्ट से छिपाई मौत की जानकारी
सुनवाई के दौरान रेलवे अफसरों ने प्रताप बर्मन की मौत और अपोलो अस्पताल में हुए हंगामे की जानकारी हाईकोर्ट से छिपा ली। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह गंभीर लापरवाही है।
परिजनों और ग्रामीणों का प्रदर्शन
मृतक की पत्नी खुशबू बर्मन गोद में मासूम बच्चे को लेकर धरने पर बैठी है। उसका कहना है—“हमारा सब कुछ चला गया, अब रेलवे को मुआवजा, नौकरी और बच्चे की पढ़ाई की जिम्मेदारी लेनी होगी।” परिजनों ने शुक्रवार को शव रखकर धरना जारी रखने की चेतावनी दी है।
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद हैं। इस दौरान पामगढ़ की विधायक शेष राज हरवंश भी पहुंचीं और रेलवे प्रशासन व ठेकेदार पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इलाज का खर्च उठाने में रेलवे और ठेकेदार दोनों ने आनाकानी की, जिसके चलते प्रताप की मौत हुई।
