छत्तीसगढ़सरगुजा

धौरपुर राजपरिवार में मिलीं दुर्लभ पाण्डुलिपियां, ताड़पत्रों पर सुरक्षित हैं रामायण-महाभारत और तंत्र विद्या के ग्रंथ

अंबिकापुर। सरगुजा जिले के धौरपुर क्षेत्र से भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण खोज सामने आई है। धौरपुर के राजपरिवार के पास संरक्षित दुर्लभ धार्मिक और ऐतिहासिक पाण्डुलिपियों का खुलासा हुआ है। इन पाण्डुलिपियों में ताड़पत्रों पर लिखी रामायण, महाभारत, पुराण, तंत्र-मंत्र, विष्णु सहस्त्रनाम और वनदुर्गा महाविद्या जैसे प्राचीन ग्रंथ शामिल हैं। कुल 11 महत्वपूर्ण पाण्डुलिपियों की पहचान की गई है, जिन्हें अब संरक्षित और डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार, यह दुर्लभ संग्रह धौरपुर राजपरिवार के पास लंबे समय से सुरक्षित रखा गया था। हाल ही में “ज्ञानभारतम पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान” के तहत इन पाण्डुलिपियों का दस्तावेजीकरण और अध्ययन किया गया। अभियान के दौरान सामने आई सामग्री को देखकर अधिकारी और शोधकर्ता भी आश्चर्यचकित रह गए।

इन पाण्डुलिपियों में धार्मिक ग्रंथों के साथ-साथ तंत्र विद्या और प्राचीन आध्यात्मिक साधनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज भी मिले हैं। इनमें वनदुर्गा महाविद्या, काली तंत्र, वशीकरण मंत्र और विष्णु सहस्त्रनाम जैसे विषय प्रमुख हैं। इसके अलावा अर्कसेल वंशावली से संबंधित ऐतिहासिक दस्तावेज भी मिले हैं, जिन्हें क्षेत्रीय इतिहास के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ पाण्डुलिपियां वर्ष 1842 और 1959 की हैं, जो अब शोधकर्ताओं और इतिहासकारों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई हैं। ताड़पत्रों पर लिखी इन पाण्डुलिपियों की लेखन शैली, संरचना और संरक्षण की स्थिति भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्धि को दर्शाती है।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय अग्रवाल ने भी इन दुर्लभ पाण्डुलिपियों का अवलोकन किया। उन्होंने डिजिटल संरक्षण की प्रक्रिया को देखा और अधिकारियों को इस धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि पाण्डुलिपियों को स्कैन कर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जा रहा है, ताकि भविष्य में शोध और अध्ययन के लिए इन्हें सुरक्षित रखा जा सके।

एन्थ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के अधिकारियों ने इन पाण्डुलिपियों को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि इस प्रकार की सामग्री न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं की जानकारी देती है, बल्कि उस दौर के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक इतिहास को समझने में भी मदद करती है।

स्थानीय लोगों और इतिहास प्रेमियों में इस खोज को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि यदि इन पाण्डुलिपियों पर गहन शोध किया जाए तो सरगुजा और आसपास के क्षेत्रों के इतिहास से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

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