
ग्राम मुरा में पत्थर खदानों एवं क्रेशर इकाइयों पर सख्ती, पर्यावरण मंडल ने दिए कार्रवाई के निर्देश
रायपुर। ग्राम मुरा स्थित पत्थर खदानों एवं क्रेशर इकाइयों में कथित अवैध उत्खनन, अनियंत्रित ब्लास्टिंग और पर्यावरण प्रदूषण की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने सख्त रुख अपनाया है। मंडल द्वारा अपर कलेक्टर रायपुर को पत्र प्रेषित कर मामले में कठोर कानूनी कार्रवाई और उच्चस्तरीय जांच की अनुशंसा की गई है।

इसी क्रम में मेसर्स श्री जगदीश पटेल (लाइम स्टोन माइनिंग), खसरा क्रमांक 629, ग्राम मुरा, तहसील तिल्दा, जिला रायपुर का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि इकाई द्वारा जल एवं वायु प्रदूषण नियंत्रण संबंधी आवश्यक वैधानिक सम्मतियां प्राप्त किए बिना संचालन किया जा रहा था। इस अनियमितता को गंभीर मानते हुए छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 33क तथा वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 31क के तहत पत्र क्रमांक 818, दिनांक 21 मई 2026 जारी कर पत्थर उत्खनन कार्य तत्काल प्रभाव से बंद करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही विद्युत विभाग को इकाई की बिजली आपूर्ति विच्छेदित करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

यह पूरी कार्रवाई श्री दीपक कुमार द्वारा कलेक्टर जनदर्शन में प्रस्तुत शिकायत (टोकन क्रमांक – 2110926000580, दिनांक 11 मई 2026) के आधार पर प्रारंभ की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ग्राम मुरा क्षेत्र में संचालित कुछ पत्थर खदानों एवं क्रेशर इकाइयों द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए खतरनाक एवं अनियंत्रित ब्लास्टिंग की जा रही है, जिससे ग्रामीणों के मकानों, जनजीवन और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
शिकायत में अवैध उत्खनन, संभावित रॉयल्टी चोरी तथा विस्फोटक अधिनियम के उल्लंघन जैसी गंभीर अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया है। लगातार हो रही ब्लास्टिंग और धूल प्रदूषण से क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य पर खतरा उत्पन्न होने की बात कही गई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पर्यावरण मंडल ने प्रशासन से उच्चस्तरीय एसआईटी (Special Investigation Team) अथवा विशेष तकनीकी जांच दल गठित कर विस्तृत जांच कराने की मांग की है। साथ ही संबंधित खदानों एवं क्रेशर इकाइयों का भौतिक सत्यापन कर नियम विरुद्ध संचालन पाए जाने पर उन्हें तत्काल सील करने की अनुशंसा भी की गई है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जांच पूरी होने तक विवादित खदानों और क्रेशर इकाइयों के संचालन पर रोक लगाई जाए, ताकि किसी संभावित दुर्घटना अथवा जनहानि की स्थिति से बचा जा सके।




