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सदन में गूंजा सर्पदंश से होने वाली मौतों पर मुआवजा में अनियमितता मामला: सत्ता पक्ष के विधायक ने करोड़ों रुपये भ्रष्टाचार का लगाया आरोप

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज सर्पदंश से होने वाले मौत पर मिलने वाले मुआवजा में अनियमितता का मामला गूंजा। सत्ता पक्ष के विधायक सुशांत शुक्ला ने इस मामले में राजस्व और स्वास्थ विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। विभागीय मंत्री ने इसके प्रमाण उपलब्ध कराने पर जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की घोषणा सदन में की।

प्रश्नकाल के दौरान बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने पूछा कि वर्ष 2022 से 2025 तक बिलासपुर और जशपुर जिले में सर्पदंश से कितनी मौत हुई और प्रभावित परिवार को कितनी मुआवजा राशि दी गई है। राजस्व मंत्री टकराम वर्मा ने बताया कि जशपुर जिले में इस अवधि में 96 और बिलासपुर जिले में 431 मौतें हुई हैं। इन सभी प्रकरणों में प्रभावित हर परिवार को 4 लाख की मुआवजा राशि दी गई है।

मंत्री के जवाब पर असहमति जताते हुए भाजपा विधायक ने पूछा कि छत्तीसगढ़ का सर्पलोक जशपुर जिले को माना जाता है। इसके बाद भी वहां मौतों का आंकड़ा बिलासपुर से अधिक कैसे हो सकता है। इसमें जशपुर में 3.84 करोड़ और बिलासपुर जिले में 34 करोड़ का मुआवजा बांट दिया गया है।भाजपा विधायक ने इस मुआवजा की आड़ में करोड़ों का भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए इसमें शामिल स्वास्थ्य और राजस्व विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। विभागीय मंत्री ने जानकारी उपलब्ध कराने पर जांच कराने की घोषणा सदन में की। चर्चा में सत्ता पक्ष के धरमजीत सिंह और भावना वोहरा ने भी भाग लेते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एंटी वेनम वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी जिस पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने यह वैक्सीन सभी छोटे अस्पतालों में भी उपलब्ध कराने का भरोसा सदन को दिलाया।

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