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33 हजार से ज्यादा किसानों का नाम पीएम किसान योजना से कटा, कहीं आप भी ये जरूरी अपडेट मिस नहीं कर रहे?

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में बड़े स्तर पर अपात्र लाभार्थियों की छंटनी की गई है। जांच में सामने आया कि हजारों लोग पात्रता नियमों का उल्लंघन कर योजना का लाभ ले रहे थे। प्रशासन ने सत्यापन अभियान चलाकर ऐसे लाभार्थियों को सूची से हटाना शुरू किया, जिसके बाद जिले में लाभार्थियों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अब सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में किसान की आधिकारिक पहचान ‘फार्मर आईडी’ से ही होगी और इसके बिना किसी भी कृषि योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

हजारों अपात्र किसानों के नाम सूची से हटे

जांच में कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। सबसे अधिक 24,318 ऐसे लोग पाए गए जो सरकारी कर्मचारी या पेंशनभोगी होते हुए भी योजना की किस्त ले रहे थे, जबकि नियमों के अनुसार वे पात्र नहीं हैं। इसके अलावा 3,911 आयकरदाता किसान भी गलत तरीके से लाभ ले रहे थे। जांच में 3,571 ऐसे मामले भी मिले जहां लाभार्थी की मृत्यु के बाद भी उनके बैंक खातों में किस्तें जारी थीं। कई मामलों में आधार कार्ड और जमीन के रिकॉर्ड (जमाबंदी) में नाम और विवरण मेल नहीं खा रहे थे, जिससे पात्रता संदिग्ध पाई गई।

जांच का एक चौंकाने वाला पहलू अंतरराज्यीय गड़बड़ी का भी सामने आया। कई लोग निवास झारखंड में कर रहे थे लेकिन लाभ बिहार के कोटे से उठा रहे थे। इसके अलावा कई ऐसे लोग चिन्हित किए गए जिनके नाम पर जमीन बहुत कम थी या भूमि रिकॉर्ड में उनका नाम दर्ज ही नहीं था। प्रशासन का कहना है कि इस तरह की अनियमितताओं से वास्तविक किसानों को नुकसान होता है, इसलिए सख्त सत्यापन जरूरी था।

अपात्र लाभार्थियों की छंटनी के बाद जिले के आंकड़ों में बड़ा बदलाव आया है। पहले कुल लाभार्थियों की संख्या 2,74,158 थी, जिसमें से 33,325 नाम हटाए गए। अब सक्रिय लाभार्थियों की संख्या घटकर 2,40,833 रह गई है। हालांकि इसमें भी एक बड़ी चुनौती सामने आई है। वर्तमान लाभार्थियों में से केवल 1,11,487 किसानों की ही फार्मर आईडी बन पाई है, जबकि 1,29,346 किसानों की आईडी अभी लंबित है। ऐसे किसानों की अगली किस्त रुकने का खतरा बना हुआ है।

अब फार्मर आईडी होगी अनिवार्य पहचान

प्रशासन ने साफ कहा है कि अब फार्मर आईडी ही किसान की मुख्य पहचान होगी। जिन किसानों के नाम पर जमीन है, उन्हें अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा, चाहे वे खेती के साथ अन्य व्यवसाय या निजी नौकरी ही क्यों न करते हों। फार्मर आईडी न होने पर न केवल पीएम किसान की किस्त रुकेगी बल्कि अन्य कृषि योजनाओं का लाभ भी नहीं मिलेगा। जिले की स्थिति की बात करें तो फार्मर आईडी बनाने में जिला राज्य में तीसरे स्थान पर है, जबकि फार्मर रजिस्ट्री में चौथे स्थान पर बताया गया है।

सरकार ने पूरी प्रक्रिया को तेज करने के लिए 2 मार्च तक विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। प्रखंड स्तर पर अधिकारियों को लक्ष्य दिए गए हैं कि वे पात्र किसानों का ई-केवाईसी और फार्मर आईडी पंजीकरण जल्द से जल्द पूरा कराएं। किसानों से अपील की गई है कि वे किसी भी परेशानी से बचने के लिए तुरंत अपने नजदीकी कृषि कार्यालय या कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) में जाकर रजिस्ट्रेशन और सत्यापन प्रक्रिया पूरी कराएं।

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