
जांच में कैप्सूल वाहनों में लगे GPS सिस्टम की मदद से पूरे मामले का खुलासा हुआ। पुलिस के अनुसार, 31 मार्च को 2 कैप्सूल, 1 अप्रैल को 1, 3 अप्रैल को 1 और 5 अप्रैल को 2 कैप्सूल से गैस निकाली गई। इस दौरान कुल 90 मीट्रिक टन गैस अवैध रूप से खाली कर बाजार में बेची गई।
जब्त दस्तावेजों की जांच में खरीद और बिक्री के आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आया। रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल में केवल 47 टन गैस खरीदी गई थी और शुरुआती स्टॉक भी शून्य था, लेकिन बिक्री 107 टन से ज्यादा दिखाई गई। पुलिस इसे चोरी और कालाबाजारी का बड़ा प्रमाण मान रही है।
पूछताछ में प्लांट कर्मचारियों ने बताया कि अधिकारियों के निर्देश पर गैस को पहले प्लांट के बुलेट टैंक में खाली किया जाता था। इसके बाद निजी टैंकरों के जरिए रायपुर और आसपास के इलाकों में कच्चे चालान के माध्यम से सप्लाई की जाती थी। जांच में 4 से 6 टन गैस की अवैध सप्लाई के सबूत भी मिले हैं।
मामले में प्लांट मैनेजर निखिल वैष्णव, खाद्य अधिकारी अजय यादव, सहायक खाद्य अधिकारी मनीष यादव और पंकज चंद्राकर को हिरासत में लिया गया है। वहीं ठाकुर पेट्रोकेमिकल के संचालक संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश जारी है।



