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डायबिटीज पर बेलपत्र का प्रहार, ब्लड शुगर को जड़ से काबू करने वाला आयुर्वेदिक ‘वरदान’

नई दिल्ली — भारत अब ‘डायबिटीज कैपिटल’ बनता जा रहा है। खराब खान-पान और तनाव ने युवाओं को भी इंसुलिन की सुई तक पहुँचा दिया है। लेकिन प्रकृति के पास इसका एक सटीक जवाब है। विशेषज्ञ ने ‘बिल्व पत्र’ यानी बेलपत्र को शुगर के मरीजों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं बताया है। यह केवल पूजा की सामग्री नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली औषधि है।

कैसे काम करता है बेलपत्र का ‘जादू’?

विश्लेषण के अनुसार, बेलपत्र के भीतर फ्लेवोनोइड्स और ग्लाइकोसाइड्स की भारी मात्रा पाई जाती है। ये तत्व शरीर में जाकर इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ाते हैं। जब इंसुलिन सही से काम करता है, तो खून में मौजूद ग्लूकोज का स्तर अपने आप गिरने लगता है।

Pancreas Protection: बेलपत्र पैंक्रियाज की बीटा-सेल्स को डैमेज होने से बचाता है।

Natural Filter: यह शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकाल कर मेटाबॉलिज्म तेज करता है।

No Side Effects: एलोपैथिक दवाओं के विपरीत, यह लिवर और किडनी पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालता।

उपयोग करने का सही तरीका

डॉक्टर ने स्पष्ट किया है कि लाभ पाने के लिए अनुशासन जरूरी है। आप बेलपत्र का उपयोग तीन तरीकों से कर सकते हैं:

डायबिटीज पर बेलपत्र का प्रहार

  • सुबह खाली पेट: 2-3 ताजे बेल के पत्तों को धोकर सीधे चबाएं।
  • काढ़ा बनाकर: पत्तों को पानी में उबालें और जब पानी आधा रह जाए तो उसे गुनगुना पिएं।
  • चूर्ण का सेवन: सूखे पत्तों को पीसकर आधा चम्मच चूर्ण पानी के साथ लें।

डॉक्टर की राय

“डायबिटीज केवल दवा से ठीक नहीं होती, इसके लिए शरीर के अंगों का सक्रिय होना जरूरी है। बेलपत्र पैंक्रियाज को फिर से ‘रिबूट’ करने की ताकत रखता है। यदि इसे सही दिनचर्या के साथ जोड़ा जाए, तो शुगर लेवल में भारी गिरावट देखी जा सकती है।”

आयुर्वेद विशेषज्ञ

क्या है इसका भविष्य?

आयुर्वेद की ओर बढ़ती दुनिया अब नेचुरल हीलिंग पर भरोसा कर रही है। बेलपत्र का अर्क कई आधुनिक दवाओं में भी इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी आयुर्वेदिक नुस्खे को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें, खासकर यदि आप पहले से ही हाई-डोज दवाओं पर हैं।

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