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रोजाना 3 लीटर पानी का टारगेट: एक महीने में शरीर के भीतर कैसे बदलता है ‘बायोलॉजिकल सिस्टम’, एक्सपर्ट से जानें

हेल्थ:  क्या आप जानते हैं कि अगले 30 दिनों तक रोजाना 3 लीटर पानी पीने का साधारण सा फैसला आपके शरीर के आंतरिक कामकाज यानी ‘बायोलॉजिकल क्लॉक’ को पूरी तरह रीसेट कर सकता है? न्यूट्रिशनिस्ट वेनेका जैन के अनुसार, यह केवल प्यास बुझाने का माध्यम नहीं है, बल्कि एक ऐसी रिकवरी जर्नी है जिससे शरीर खुद को नए सिरे से तैयार करता है।

बायोलॉजिकल चेंज: 30 दिनों का सफर और शरीर पर असर

जब आप लगातार एक महीने तक पर्याप्त हाइड्रेशन (3 लीटर प्रतिदिन) बनाए रखते हैं, तो शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंग—किडनी और लिवर—अधिक कुशलता से काम करने लगते हैं। वेनेका जैन बताती हैं कि इस दौरान शरीर में जमा टॉक्सिन्स (विषाक्त पदार्थ) पसीने और यूरिन के जरिए तेजी से बाहर निकलने लगते हैं। इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में ‘सेलुलर डिटॉक्सिफिकेशन’ कहा जा सकता है।

इस बदलाव के मुख्य चरण इस प्रकार हैं:

पहले 10 दिन: मेटाबॉलिज्म में सुधार महसूस होता है और एनर्जी लेवल बढ़ता है।

20वें दिन तक: त्वचा की चमक (Skin Glow) में सुधार होता है और आंखों के नीचे के काले घेरे कम होने लगते हैं।

30वें दिन: पाचन तंत्र पूरी तरह व्यवस्थित हो जाता है और बेवजह लगने वाली भूख पर नियंत्रण मिलता है।

विशेषज्ञ की राय: क्या यह सबके लिए सुरक्षित है?

“3 लीटर पानी पीना एक आदर्श मानक हो सकता है, लेकिन इसे अचानक शुरू करने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए। हर शरीर की जरूरत उसके वजन और फिजिकल एक्टिविटी पर निर्भर करती है। अगर आपको किडनी से जुड़ी कोई समस्या है, तो इस रूटीन को शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह अनिवार्य है।” — वेनेका जैन, न्यूट्रिशनिस्ट

सावधानियां और जमीनी हकीकत

ज्यादा पानी पीने का मतलब यह कतई नहीं है कि आप एक ही बार में 1 लीटर पानी पी जाएं। हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह है कि पानी को छोटे अंतराल  में पिएं। सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना इस ‘बायोलॉजिकल चेंज’ की प्रक्रिया को तेज कर सकता है। दिल्ली और एनसीआर जैसे प्रदूषित शहरों में रहने वाले लोगों के लिए हाइड्रेशन और भी जरूरी है, क्योंकि यह फेफड़ों की कार्यक्षमता को बनाए रखने में मदद करता है।

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