
रायपुर। जिले के तिल्दा विकासखंड के ग्राम सोनतरा से एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है, जहां ग्राम सभा की चारागाह भूमि को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। ग्राम पंचायत ने इस संबंध में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की है।
मामला ग्राम सोनतरा की उस भूमि से जुड़ा है, जो ग्राम रायखेड़ा, पटवारी हल्का नंबर 52 में स्थित है। इस भूमि का खाता नंबर 815 है और इसमें खसरा नंबर 25/1, 27/1 और 28/1 शामिल हैं। कुल मिलाकर यह भूमि कई हेक्टेयर में फैली हुई है, जिसका उपयोग वर्षों से ग्रामवासियों द्वारा किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि यह भूमि वर्ष 1973 में ग्राम सभा सोनतरा द्वारा बस्ती फंड और चारागाह मद की राशि से विधिवत खरीदी गई थी। तब से लेकर आज तक इस भूमि पर ग्राम सभा और ग्राम पंचायत का कब्जा बना हुआ है।
इस भूमि का उपयोग गांव में पशुओं की चराई, जल संरक्षण और खेती के लिए किया जाता है। यहां तालाब भी मौजूद है, जिससे ग्रामीण अपने खेतों की सिंचाई करते हैं। साथ ही शासन द्वारा यहां गोठान भी स्थापित किया गया है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अब आरोप है कि इस भूमि के कुछ दर्ज खातेदार फौती नामांतरण के माध्यम से इस चारागाह भूमि को बेचने की तैयारी कर रहे हैं। इस पर ग्राम पंचायत और ग्राम सभा ने आपत्ति दर्ज कराते हुए तहसीलदार खरोरा के समक्ष प्रकरण भी प्रस्तुत किया था। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि अब तक इस मामले में कोई ठोस जांच या कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे असंतोष बढ़ता जा रहा है। “यह जमीन हमारे गांव की है, यहां हमारे पशु चरते हैं और हम खेती करते हैं। अगर यह बिक गई तो गांव का बड़ा नुकसान होगा।”

ग्राम पंचायत सोनतरा और ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि इस भूमि की बिक्री पर तत्काल रोक लगाई जाए और इसे राजस्व अभिलेखों में ग्राम सभा के नाम दर्ज किया जाए। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।




