पेट, त्वचा और जोड़ों के लिए रामबाण है वरुण मुद्रा, जानें नियमित अभ्यास के फायदे

हेल्थ : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में देर रात तक मोबाइल और लैपटॉप स्क्रीन पर समय बिताना, अनियमित खानपान, कम पानी पीने की आदत और लगातार तनाव लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। इसका सीधा असर सबसे पहले पेट, त्वचा और जोड़ों पर देखने को मिलता है। त्वचा का जरूरत से ज्यादा रूखा हो जाना, पेट साफ न रहना, गैस-एसिडिटी और जोड़ों में जकड़न अब आम समस्याएं बन चुकी हैं। ऐसे में आयुष मंत्रालय योग को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देता है।
योग की कई सरल मुद्राएं शरीर में संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं, जिनमें वरुण मुद्रा को विशेष महत्व दिया गया है।आयुष मंत्रालय के योग शास्त्र के अनुसार मानव शरीर पंचतत्वों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—से बना है। इनमें जल तत्व का सीधा संबंध त्वचा की नमी, पाचन तंत्र और जोड़ों की चिकनाहट से होता है। जब शरीर में जल तत्व असंतुलित हो जाता है, तो ड्राय स्किन, कब्ज, गैस और जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। वरुण मुद्रा को जल तत्व को संतुलित करने वाली प्रभावी मुद्रा माना जाता है।
वरुण मुद्रा के प्रमुख फायदे
नियमित अभ्यास से शरीर में पानी का संतुलन बेहतर होता है, जिससे त्वचा में नमी बनी रहती है और रूखापन कम होता है। यह मुद्रा पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद करती है, जिससे कब्ज, गैस और एसिडिटी की समस्या में राहत मिल सकती है। जोड़ों के लिए भी यह मुद्रा लाभकारी मानी जाती है, क्योंकि यह शरीर में लुब्रिकेशन बढ़ाकर जकड़न और दर्द को कम करने में सहायक होती है। इसके अलावा, यह मुद्रा शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में भी मदद करती है।
अभ्यास करने की विधि
वरुण मुद्रा का अभ्यास शांत वातावरण में, पद्मासन या सुखासन में बैठकर किया जा सकता है। अंगूठे और छोटी उंगली के सिरे को आपस में मिलाकर बाकी उंगलियों को सीधा रखें। रोजाना 20–30 मिनट तक इसका अभ्यास करना लाभकारी माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर वरुण मुद्रा को नियमित योग अभ्यास और संतुलित आहार के साथ अपनाया जाए, तो पेट, त्वचा और जोड़ों से जुड़ी कई समस्याओं में प्राकृतिक रूप से सुधार देखा जा सकता है।



