
रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर प्रवर्तन एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। भारतमाला प्रोजेक्ट से जुड़े कथित मुआवजा घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा ने संयुक्त रूप से छापेमारी की है। यह कार्रवाई भाजपा के पूर्व मंत्री के करीबी रिश्तेदारों के ठिकानों पर की गई, जिससे प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, ईडी ने पूर्व मंत्री के चचेरे भाई भूपेंद्र चंद्राकर के घर पर छापा मारा है। इसके अलावा पूर्व राइस मिल अध्यक्ष रोशन चंद्राकर के ठिकानों पर भी जांच एजेंसियों ने कार्रवाई की है। सूत्रों के मुताबिक, यह छापेमारी भारतमाला परियोजना के तहत जमीन अधिग्रहण में हुए कथित मुआवजा घोटाले से जुड़ी हुई है।
जांच एजेंसियों को मिली शिकायत में आरोप लगाया गया है कि भूपेंद्र चंद्राकर ने अपने प्रभाव का उपयोग कर न केवल अभनपुर क्षेत्र में, बल्कि अन्य कई तहसीलों में भी अपने करीबियों को करोड़ों रुपये का मुआवजा दिलवाया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि जमीन अधिग्रहण के दौरान नियमों की अनदेखी कर फर्जी तरीके से मुआवजा राशि स्वीकृत कराई गई।
बताया जा रहा है कि अभनपुर के कायाबांधा क्षेत्र में ही करोड़ों रुपये का मुआवजा संदिग्ध परिस्थितियों में प्राप्त किया गया। इसके अलावा दुर्ग, पाटन, राजनांदगांव के देवादा और मगरलोड तहसील में भी इसी तरह की अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।
सूत्रों के अनुसार, शिकायत के साथ एजेंसियों को कई अहम दस्तावेज भी सौंपे गए थे, जिनके आधार पर यह कार्रवाई की गई। फिलहाल ईडी और ईओडब्ल्यू की टीम संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है और वित्तीय लेन-देन के पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है।
इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, अभी तक संबंधित पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस पूरे मामले में और भी लोग शामिल हैं और मुआवजा वितरण में किन-किन स्तरों पर गड़बड़ी हुई।
माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल, एजेंसियों की कार्रवाई जारी है और दस्तावेजों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।



