धार्मिक

गुरु-पुष्य महासंयोग: लक्ष्मीपति की कृपा और ऋण मुक्ति का महामुहूर्त : आचार्य पं. गिरीश पाण्डेय

आज 21 मई 2026, गुरुवार का दिन आध्यात्मिक और आर्थिक दृष्टि से एक अत्यंत दुर्लभ और अलौकिक योग लेकर आया है। पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ (अधिक) मास की इस पावन तिथि पर नक्षत्रों के राजा पुष्य नक्षत्र और देवगुरु बृहस्पति के दिन गुरुवार का मिलन हो रहा है, जिससे “गुरु-पुष्य अमृत योग” का निर्माण हुआ है।इसके साथ ही आज पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का त्रिवेणी संगम भी बना हुआ है। ज्योतिष शास्त्र में इस महासंयोग को धन, समृद्धि और विशेष रूप से ऋणों (कर्ज) से मुक्ति के लिए अचूक माना गया है।

आइए, ज्योतिष की दृष्टि से समझते हैं कि आज के दिन लक्ष्मीपति नारायण और महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त कर कैसे दरिद्रता और कर्जों के बोझ से मुक्ति पाई जा सकती है:

🌟 गुरु-पुष्य योग और ऋण मुक्ति का संबंध

पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि देव हैं (जो कर्म और न्याय के कारक हैं) और इसके अधिष्ठाता देवता देवगुरु बृहस्पति हैं। जब यह नक्षत्र गुरुवार को आता है, तो गुरु की शुभता और शनि का स्थायित्व मिलकर एक ऐसा सुरक्षा कवच बनाते हैं, जो संचित धन की रक्षा करता है और आय के नए मार्ग खोलता है।

“शास्त्रों के अनुसार, गुरु-पुष्य योग में शुरू किया गया धन संबंधी प्रयास या ऋण अदायगी का संकल्प कभी निष्फल नहीं होता।”

🔮 ऋण मुक्ति और लक्ष्मी कृपा के अचूक उपाय (आज अवश्य करें)

यदि आप लंबे समय से कर्ज के जाल में फंसे हैं या आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, तो आज की रात 02:49 (22 मई की सुबह) तक रहने वाले इस महामुहूर्त में ये उपाय अवश्य करें:

कनकधारा या श्रीसूक्त का पाठ: आज शाम के समय मां लक्ष्मी और विष्णु जी (लक्ष्मीपति) के सम्मुख गाय के घी का दीपक जलाएं। केसर का तिलक लगाएं और श्रीसूक्त या कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें। यह दरिद्रता का नाश करने वाला माना गया है।

कर्ज की पहली किस्त या संकल्प: यदि संभव हो, तो आज अपने कर्जदार को धन का कुछ हिस्सा (चाहे छोटा ही क्यों न हो) वापस लौटाएं। यदि मिलना संभव न हो, तो बैंक खाते के माध्यम से या मन में संकल्प लेकर कुछ राशि अलग निकाल दें। आज के दिन चुकाया गया कर्ज दोबारा नहीं लौटता।

पीली वस्तुओं और हल्दी का प्रयोग: गुरु पुष्य के प्रभाव को बढ़ाने के लिए माता लक्ष्मी और श्री हरि को हल्दी का तिलक लगाएं और स्वयं भी तर्जनी उंगली से माथे पर हल्दी या केसर का तिलक धारण करें। चने की दाल या पीले फल का दान गुनियादी तौर पर भाग्य जागृत करता है।

पीपल वृक्ष की सेवा: चूंकि चंद्रमा आज अपनी स्वराशि कर्क में पुष्य नक्षत्र पर हैं, इसलिए संध्याकाल में पीपल के वृक्ष के नीचे चौमुखा (चार मुख वाला) दीपक जलाएं और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। इससे पितृ दोष और आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं।

⏳ मुहूर्त का समय
गुरु-पुष्य योग अवधि: आज 21 मई को सूर्योदय से लेकर मध्यरात्रि के बाद (22 मई की सुबह) 02:49 बजे तक।

अमृत काल और शुभ चौघड़िया:
शाम का समय साधना और लक्ष्मी आराधना के लिए सर्वश्रेष्ठ है।

निष्कर्ष: अधिक मास में ज्येष्ठ के महीने में ऐसा संयोग आना एक दिव्य घटना है। लक्ष्मीपति नारायण की कृपा से आज का यह दिन आपके जीवन से अभावों का अंधकार मिटाकर समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करे, यही मंगल कामना है।
आज के इस महायोग का पूरा लाभ उठाएं और अपने जीवन को आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाएं। शुभम भवतु!

पं. गिरीश पाण्डेय
एस्ट्रो-गुरू, भागवत-व्यास
एस्ट्रो- सेज पैनल -मेंबर
सचिव पुरोहित मंच
ज़िला- महासमुन्द छ.ग.
संपर्क सूत्र – 7000217167
संकट मोचन मंदिर
मण्डी परिसर,पिथौरा

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(शुल्क -५०१/-)

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