रायपुर। प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। सतनामी समाज के प्रमुख धर्मगुरु गुरु बालदास के बड़े बेटे और विष्णुदेव साय सरकार में मंत्री खुशवंत साहेब के बड़े भाई ढाल दास साहेब ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के रायपुर स्थित निवास पर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्हें विधिवत पार्टी की सदस्यता दिलाई गई। भूपेश बघेल ने ढाल दास को कांग्रेस का गमछा पहनाकर पार्टी में स्वागत किया।

सियासी गलियारों में चर्चा तेज, क्या हैं मायने?
- पारिवारिक ‘पावर बैलेंस’ में बदलाव: एक तरफ जहां खुशवंत साहेब भाजपा सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके बड़े भाई का कांग्रेस में जाना परिवार के भीतर और समाज में नए सियासी समीकरणों को जन्म दे रहा है।
- सतनामी समाज पर असर: गुरु बालदास का सतनामी समाज में गहरा प्रभाव और बड़ा जनाधार माना जाता है। ऐसे में ढाल दास के इस कदम से आगामी चुनावों और मैदानी राजनीति में कांग्रेस को समाज के एक बड़े वर्ग को साधने में मदद मिल सकती है।
- कांग्रेस का मास्टरस्ट्रोक: राज्य की सियासत में अनुसूचित जाति (SC) वोट बैंक हमेशा निर्णायक भूमिका निभाता है। कांग्रेस ढाल दास के प्रवेश को समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के बड़े मौके के रूप में देख रही है।
ढाल दास के इस अचानक उठाए गए कदम के बाद प्रदेश का राजनीतिक पारा चढ़ गया है और इसे भाजपा के लिए सतनामी समाज के प्रभाव वाले क्षेत्रों में एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है।




