रायपुर, 4 अक्टूबर 2026: छत्तीसगढ़ में आगामी शारदीय नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबा आयोजनों को लेकर एक नया विवाद शुरू हो गया है। छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने मुस्लिम युवाओं के गरबा में शामिल होने को लेकर एक बड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने मुस्लिम समाज के युवाओं से अपील की है कि वे गरबा पंडालों से दूरी बनाएं।
डॉ. सलीम राज ने स्पष्ट किया कि गरबा केवल कोई नृत्य या मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हिंदू समाज में मां दुर्गा की आराधना से जुड़ा एक पवित्र धार्मिक अनुष्ठान और आस्था का केंद्र है।
“मूर्ति पूजा में यकीन नहीं, तो गरबा में जाने की जरूरत नहीं”
वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि चूंकि इस्लाम में मूर्ति पूजा को मान्यता नहीं है और मुस्लिम समाज की इसमें कोई धार्मिक आस्था नहीं है, इसलिए मुस्लिम युवाओं को गरबा कार्यक्रमों में शामिल होने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे गरबा को सिर्फ पर्यटन स्थल, घूमने या मनोरंजन का केंद्र मानकर वहां जाने से पूरी तरह परहेज करें।
शामिल होने के लिए रखीं कड़ी शर्तें
डॉ. सलीम राज ने कहा कि यदि इसके बावजूद कोई मुस्लिम युवक गरबा में शामिल होना चाहता है, तो उसे निम्नलिखित नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा:
- आयोजन समिति की अनुमति: गरबा पंडाल में प्रवेश करने से पहले नवरात्रि आयोजन समिति से बाकायदा अनुमति लेनी होगी और अपना सही नाम दर्ज कराना होगा।
- धार्मिक नियमों का पालन: कार्यक्रम में शामिल होने वाले व्यक्ति को वहां की परंपराओं का सम्मान करना होगा। उन्होंने कहा कि यदि मुस्लिम युवा वहां जाते हैं, तो उन्हें तिलक लगाना होगा, कलावा बांधना होगा, गंगाजल ग्रहण करना होगा और मूर्ति पूजा व आरती में भी शामिल होना होगा।
- परिवार के साथ सहभागिता: उन्होंने अपील की कि यदि कोई गरबा में जाता है, तो वह केवल अपनी मां, बहन और बेटियों के साथ ही शामिल हो, न कि दूसरे समाज की महिलाओं के साथ।
हिंदू संगठनों का रुख
इस बीच, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद (VHP) जैसे संगठनों ने भी गरबा को लेकर अपनी चेतावनी दी है। संगठनों का कहना है कि गरबा एक पूर्णतः धार्मिक आयोजन है और इसे व्यावसायिक इवेंट या विशुद्ध मनोरंजन का रूप नहीं दिया जाना चाहिए। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने भी हिंदू संगठनों के इस रुख का स्वागत किया है और मुस्लिम समाज से शांति व सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की है।
पर्व से ठीक पहले आए इस बयान के बाद राज्य में गरबा पंडालों में एंट्री और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है।




