गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में लगातार हो रही भारी बारिश ने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों और पुल-पुलियों के बुनियादी ढांचे की पोल खोलकर रख दी है। ग्राम पंचायत धनोरा के आश्रित ग्राम पीपलखुटा में पटेलपारा-पीपलखुटा नाला पर बना पुल पानी के तेज बहाव में पूरी तरह बह गया है। इसके साथ ही लोहारपारा नाला भी खतरे के निशान से ऊपर (उफान पर) बह रहा है, जिसके कारण क्षेत्र के करीब 700 ग्रामीणों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है।
रोजमर्रा की जिंदगी और शिक्षा प्रभावित
यह मार्ग ग्रामीणों के लिए जीवन रेखा माना जाता है। इसी रास्ते से होकर बच्चे स्कूल और आंगनबाड़ी जाते हैं, वहीं ग्रामीण और किसान अपने खेतों तक पहुंचते हैं। पुल के बह जाने से अब स्कूली बच्चों से लेकर बुजुर्गों और बीमारों तक की मुश्किलें बेहद बढ़ गई हैं।
मरम्मत और निगरानी पर उठे गंभीर सवाल
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, धनोरा से पाटियालपारा को जोड़ने वाला यह मार्ग प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बनाया गया था। करीब दो साल पहले ही इस मार्ग की रिपेयरिंग (मरम्मत) भी की गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग द्वारा इसके बाद कोई प्रभावी मरम्मत या निगरानी नहीं रखी गई, जिसके कारण पहली ही भारी बारिश में यह पुल ढह गया।
किसानों पर दोहरी मार
इस समय क्षेत्र में खरीफ फसलों की कटाई का सीजन चल रहा है। सड़क और पुल टूटने से किसानों के सामने सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है। वे अपनी पकी हुई फसल को खेतों से घर और नजदीकी मंडियों तक नहीं ले जा पा रहे हैं। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी भारी आक्रोश है कि घटना के बाद विभागीय अमला मौके पर नहीं पहुंचा, जिसके चलते मजबूरी में ग्रामीणों को खुद ही रास्ता सुधारने का प्रयास करना पड़ रहा है।
प्रशासन की लापरवाही पर खड़े हुए सवाल
इस हादसे ने सीधे तौर पर प्रशासनिक मुस्तैदी को कटघरे में खड़ा कर दिया है:
- मॉनसून और भारी बारिश की चेतावनी के बावजूद बारिश से पहले इन संवेदनशील पुल-पुलियों का सुरक्षा निरीक्षण (Audit) क्यों नहीं किया गया?
- 700 लोगों की आबादी का संपर्क कट जाने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी अब तक मौके पर क्यों नहीं पहुंचे?
ग्रामीणों ने की कड़ी कार्रवाई और जांच की मांग
परेशान ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि उच्च अधिकारी तत्काल मौके का मुआयना करें। इसके साथ ही क्षतिग्रस्त पुल की जगह आवागमन बहाल करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए और धनोरा-पाटियालपारा मार्ग के निर्माण व मरम्मत कार्य की उच्च स्तरीय जांच कराकर इसका स्थायी समाधान निकाला जाए। सवाल सिर्फ एक पुल के बहने का नहीं है, बल्कि सरकारी पैसों के दुरुपयोग और रखरखाव में बरती गई लापरवाही का भी है।



