नई दिल्ली: सनातन धर्म में आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व है, जिसे इंदिरा एकादशी कहा जाता है। पितृ पक्ष के दौरान आने के कारण यह एकादशी भगवान विष्णु की कृपा और पूर्वजों के आशीर्वाद दोनों को एक साथ पाने का एक उत्तम अवसर होती है। साल 2026 में इंदिरा एकादशी का पावन व्रत 6 अक्टूबर, दिन मंगलवार को रखा जाएगा।
पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि की शुरुआत 6 अक्टूबर 2026 को तड़के सुबह 02:07 बजे से होगी और इसका समापन 7 अक्टूबर 2026 को मध्यरात्रि 12:34 बजे होगा। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए अगले दिन यानी 7 अक्टूबर 2026 को सुबह 06:14 बजे से सुबह 08:38 बजे के बीच व्रत पारण का समय सबसे शुभ रहेगा।
पूजा के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त
6 अक्टूबर को भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना के लिए दो बेहद खास चौघड़िया मुहूर्त मिल रहे हैं:
- लाभ चौघड़िया (सुबह): प्रातः 10:40 बजे से दोपहर 12:09 बजे तक।
- शुभ चौघड़िया (दोपहर): दोपहर 03:05 बजे से शाम 04:33 बजे तक।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इन शुभ मुहूर्तों में की गई आराधना का फल कई गुना अधिक मिलता है।
इंदिरा एकादशी की सरल पूजा विधि
- व्रत का संकल्प: एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, साफ कपड़े पहनें और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
- स्थापना व तिलक: घर के मंदिर की सफाई करके श्री हरि विष्णु या भगवान शालिग्राम की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान को पीले चंदन का तिलक लगाएं।
- पूजन सामग्री: भगवान को पीले फूल, हल्दी मिले अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें।
तुलसी दल और पितृ तर्पण का रखें विशेष ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी पत्र का होना अनिवार्य है। हालांकि, श्रद्धालुओं को यह ध्यान रखना चाहिए कि तुलसी के पत्ते एकादशी के एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें, क्योंकि एकादशी के दिन तुलसी दल तोड़ना वर्जित माना जाता है।
इसके बाद ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें और व्रत कथा पढ़ें। चूंकि यह व्रत पितृ पक्ष में आता है, इसलिए पूजा के बाद पितरों की आत्मशांति के लिए तर्पण, पिंडदान या उनका ध्यान करते हुए प्रार्थना जरूर करें। ऐसा करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पूर्वज प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।




