नई दिल्ली: सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखने वाली इंदिरा एकादशी का व्रत आज यानी 06 अक्टूबर 2026 को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ रखा जा रहा है। पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) के दौरान आने वाली इस एकादशी को पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए बेहद फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने और पूर्वजों के निमित्त व्रत रखने से सात पीढ़ियों के पितर तृप्त होते हैं।
व्रत और पारण का समय
पंचांग के अनुसार, इंदिरा एकादशी व्रत का संकल्प और पूजा आज की जा रही है, जबकि इस व्रत का पारण (व्रत तोड़ना) कल यानी 07 अक्टूबर 2026 की सुबह किया जाएगा। पारण हमेशा शुभ मुहूर्त में ही किया जाना चाहिए, जिससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
इंदिरा एकादशी का धार्मिक महत्व
पितृ पक्ष में पड़ने के कारण इंदिरा एकादशी का महत्व अन्य एकादशियों से कहीं अधिक बढ़ जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यदि कोई पूर्वज जाने-अनजाने हुए पापों के कारण यमलोक में कष्ट भोग रहे हैं, तो उनके वंशज द्वारा इस व्रत को विधि-विधान से रखकर इसका पुण्य पितरों को दान करने से उन्हें तुरंत मोक्ष की प्राप्ति होती है और वे वैकुंठ धाम चले जाते हैं।
पूजा विधि और परंपरा
- पूजा और संकल्प: आज सुबह श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान के बाद भगवान सालिग्राम या विष्णु जी की मूर्ति के सामने व्रत का संकल्प लिया।
- श्राद्ध और तर्पण: इस दिन पितरों के नाम से धूप-ध्यान, तर्पण और ब्राह्मण भोज कराने की भी विशेष परंपरा है।
- दीपदान: शाम के समय तुलसी के पौधे और घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाकर पितरों और भगवान विष्णु का आशीर्वाद मांगा जाता है।



