बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अरपा नदी में बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने बिलासपुर नगर निगम और राज्य शासन से सीवरेज ट्रीटमेंट की वास्तविक स्थिति पर जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने सीधे तौर पर पूछा है कि क्या शहर के करीब 70 नालों से निकलने वाले सीवरेज को महज 4 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के जरिए पूरी तरह साफ (ट्रीट) किया जा सकता है या नहीं?
क्षमता पर्याप्त, लेकिन कनेक्टिविटी पर सवाल
शासन द्वारा कोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक, बिलासपुर शहर से रोजाना लगभग 72.20 MLD (मिलियन लीटर प्रतिदिन) सीवरेज निकलता है। वर्तमान में संचालित 4 एसटीपी की कुल क्षमता 78 MLD है, जबकि 16-16 MLD की क्षमता वाले 2 और प्लांट अभी निर्माणाधीन हैं। इनके शुरू होने के बाद शहर की कुल ट्रीटमेंट क्षमता 94 MLD हो जाएगी।
हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामला सिर्फ कागजी क्षमता का नहीं है। अदालत ने प्रशासन से पूछा है कि क्या शहर के सभी 70 नाले इन एसटीपी ग्रिड से पूरी तरह जुड़ चुके हैं? इसके साथ ही, क्या नालों का गंदा पानी अरपा नदी में गिरने से पहले वास्तव में इंटरसेप्ट, डायवर्ट और ट्रीट किया जा रहा है?
मुख्य सचिव ने पेश किया हलफनामा, 17 नवंबर को अगली सुनवाई
इस मामले में राज्य के चीफ सेक्रेटरी (मुख्य सचिव) की ओर से अदालत में शपथ पत्र (एफिडेविट) पेश किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने संतुष्टि नहीं जताई है और अतिरिक्त व विस्तृत जानकारी के साथ नया एफिडेविट मांगा है। हाईकोर्ट अब इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को करेगा।



