दयालबंद में आबकारी विभाग की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। करीब दो से तीन महीने पुराने मामले में 5 हजार रुपये लेने और दोबारा 5 हजार रुपये मांगने के आरोप लगाए गए हैं। रकम देने से इनकार करने पर केस में फंसाने की धमकी और मारपीट के भी आरोप हैं।
हालांकि विभाग ने सभी आरोपों से इनकार किया है।सवाल यह है कि पुराने मामले में लोगों को दोबारा क्यों बुलाया गया और कार्रवाई का रिकॉर्ड तत्काल स्पष्ट क्यों नहीं किया जा सका। विभाग का कहना है कि चालान और न्यायालयीन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर के लिए बुलाया गया था, लेकिन तीन महीने बाद कागजी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मौके पर कर्मचारियों के वर्दी में नहीं होने से उनकी पहचान और भूमिका को लेकर भी सवाल उठे हैं। ऐसे में कार्रवाई के दौरान मौजूद कर्मचारियों और पूरे घटनाक्रम की जांच जरूरी है, ताकि कथित वसूली और मारपीट के आरोपों की सच्चाई सामने आ सके।
आबकारी विभाग अगर आरोपों को गलत बता रहा है तो उसे कार्रवाई का रिकॉर्ड सामने रखकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। कानून लागू करने वाले विभाग पर वसूली और दबाव के आरोप लगना उसकी पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है



