रायपुर। छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। अब बिजली का लोड बढ़ने पर हर तीन महीने बाद अतिरिक्त शुल्क बिजली बिल में नहीं जोड़ा जाएगा। छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी ने नई व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है, जिसके तहत बढ़े हुए लोड का शुल्क अब साल में केवल एक बार दिसंबर के बिजली बिल में जोड़ा जाएगा।
इस फैसले से खासकर उन उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, जिन्हें गर्मियों में बिजली की अधिक खपत और बढ़े हुए लोड शुल्क के कारण अधिक बिल का सामना करना पड़ता था।
गर्मी में ज्यादा बिल आने पर मचा था हंगामा
इस वर्ष गर्मी के मौसम में बिजली की खपत बढ़ने के साथ कई उपभोक्ताओं के बिजली बिल में अतिरिक्त लोड शुल्क भी जोड़ दिया गया था। इससे बिल काफी बढ़ गए थे और प्रदेशभर में उपभोक्ताओं ने इसका विरोध किया। इसी दौरान स्मार्ट मीटर की रीडिंग को लेकर भी सवाल उठे थे।
इन शिकायतों को देखते हुए पॉवर कंपनी ने लोड शुल्क वसूली की व्यवस्था में बदलाव करने का निर्णय लिया है।
कैसे बढ़ता है बिजली का लोड?
पॉवर कंपनी के अनुसार, अब उपभोक्ताओं को अलग से आवेदन देकर लोड बढ़ाने की आवश्यकता नहीं होती। यदि किसी उपभोक्ता के परिसर में लगातार तीन महीने तक स्वीकृत क्षमता से अधिक बिजली लोड दर्ज होता है, तो उसे बढ़ा हुआ लोड माना जाता है।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी उपभोक्ता ने 1 किलोवाट का कनेक्शन लिया है, लेकिन लगातार अधिक बिजली उपकरणों के उपयोग से उसका लोड 2 या 3 किलोवाट तक पहुंच जाता है, तो अतिरिक्त लोड के अनुसार शुल्क लगाया जाता है।
एक किलोवाट पर कितना लगता है शुल्क?
बढ़े हुए प्रत्येक 1 किलोवाट लोड पर:
मूल शुल्क: ₹800
18% जीएसटी: ₹144
कुल शुल्क: ₹944 प्रति किलोवाट
पहले यह राशि तीन महीने बाद सीधे अगले बिजली बिल में जोड़ दी जाती थी, जिससे उपभोक्ताओं का बिल अचानक बढ़ जाता था।
अब दिसंबर के बिल में ही होगी वसूली
नई व्यवस्था के तहत अब चाहे उपभोक्ता का लोड गर्मियों में बढ़े या वर्ष के किसी भी समय, उसका शुल्क साल में केवल एक बार दिसंबर माह के बिल में जोड़ा जाएगा। दिसंबर में बिजली की खपत अपेक्षाकृत कम रहती है, इसलिए उपभोक्ताओं पर एकमुश्त बिल का दबाव भी कम होगा।
दिसंबर का बिल जनवरी में जारी होगा और उसी में बढ़े हुए लोड का शुल्क शामिल रहेगा।
एमडी ने दी जानकारी
वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक भीम सिंह कंवर ने बताया कि अब बिजली उपभोक्ताओं से बढ़े हुए लोड का शुल्क हर तीन महीने में नहीं लिया जाएगा। साल में एक बार दिसंबर के बिल में ही यह शुल्क जोड़ा जाएगा, जिससे उपभोक्ताओं को बिल भुगतान में सुविधा मिलेगी।





