छत्तीसगढ़

राजधानी में ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट बनकर तैयार, उद्धाटन का इंतजार

रायपुर। नवा रायपुर स्थित ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईडीटीआर) को और आकर्षक बनाया जा रहा है। रिसर्च इंस्टीट्यूट के आस-पास आर्टिफिशियल घास लगाई जा रही है। शासन को इसका उद्घाटन कर देना था, लेकिन यह भी अभी तक नहीं हो सका है। सूत्रों की मानें तो शासन को मारुति कंपनी के साथ मिलकर इसका संचालन करना है। मारुति कंपनी द्वारा छात्रों को वाहन सिखाने के लिए गाड़ी खरीदना है, लेकिन अभी तक गाड़ी नहीं आ पाई है, जिस कारण इसकी शुरुआत नहीं हो पा रही है।

ज्ञात हो कि नया रायपुर में 20 एकड़ में 17 करोड़ की लागत से ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईडीटीआर) का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। यहां पर बस, ट्रक जैसे बड़े कमर्शियल वाहनों को चलाने के लिए 90 दिन की ट्रेनिंग दी जाएगी। नॉन कमर्शियल वाहनों को चलाने के लिए 21 दिन की ट्रेनिंग दी जाएगी। कमर्शियल वाहन चलाने वालों को यहीं से लाइसेंस बनाकर दे दिया जाएगा।

इसके साथ ही हैवी वाहन चलाने वालों को प्रदेश भर की फैक्ट्रियों में नौकरी भी दिलाई जाएगी। छात्रोें के ठहरने के लिए 80 कमरों का हॉस्टल बनाया जा रहा है, जिससे दूर दराज से आने वाले अभ्यर्थी यहां रहकर आसानी प्रशिक्षण ले सकें। प्रशिक्षण परिवहन विभाग और मारूति कंपनी के कर्मचारियों द्वारा दी जानी है। यहां पर आठ आकृति वाले ट्रैक, पैनल, रिवर्स पार्किंग, लेन चेंजिंग्स का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

ज्ञात हो कि प्रदेश में अभी तक ड्राइविंग सिखाने वाली एक भी मान्यता प्राप्त संस्था नहीं है। वाहन चालक निजी संस्थाओं में ट्रेनिंग लेकर लाइसेंस के लिए ट्रायल देते हैं। इससे उनको प्रशिक्षण केंद्र में मोटी रकम चुकानी पड़ती है। प्रशिक्षण केंद्र खोलने के बाद एजेंट और स्कूलों को मोटी रकम देने से छुटकारा मिलेगा। यहां पर प्रशिक्षित स्टाफ द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिससे लोगों को सिखने में किसी प्रकार की दिक्कत न आए। मगर, शुरू होने की वजह से छात्रों को इसका फायदा नहीं हो पा रहा है।

इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च (आइडीटीआर) में ड्राइविंग की ट्रेनिंग का मकसद है कि इससे प्रशिक्षित चालक निकलेंगे जिससे सड़क हादसे कम होंगे। वर्तमान में छत्तीसगढ़ में एक साल में करीब पांच हजार लोग सड़क हादसे में अपनी जान गवां रहे हैं। यहां के प्रशिक्षण से युवाओं को ट्रैफिक नियमों के हिसाब से ड्राइविंग की ट्रेनिंग दी जाएगी। इससे भी हादसों में कमी आएगी।

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