
अम्बिकापुर। पासपोर्ट सत्यापन के बदले रिश्वत मांगने वाले कनिष्ठ पासपोर्ट सहायक को अदालत ने तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), अम्बिकापुर ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाते हुए आरोपी को 5,000 रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया।
क्या था मामला?
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के ग्राम दोलंगी निवासी इसरार हुसैन ने एंटी करप्शन ब्यूरो, अम्बिकापुर में शिकायत दर्ज कराई थी कि वह और उसके गांव के चार अन्य लोग हज यात्रा पर जाने के लिए पासपोर्ट बनवा रहे थे। इसरार ने सभी का ऑनलाइन फॉर्म भरकर 24 मई को पासपोर्ट सेवा केंद्र, अम्बिकापुर में दस्तावेजों के सत्यापन के लिए पहुंचा।
वहीं पर संकट मोचन राय, कनिष्ठ पासपोर्ट सहायक, ने दस्तावेजों में कथित त्रुटि बताते हुए प्रत्येक व्यक्ति से कुल 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। पांचों आवेदक रिश्वत देने के पक्ष में नहीं थे और आरोपी को रंगे हाथ पकड़वाने का निर्णय लिया।
एसीबी की ट्रैप कार्रवाई
शिकायत की सत्यापन के दौरान पता चला कि आरोपी अपनी मांग घटाकर 8 हजार रुपये लेने को तैयार हो गया था। इसके बाद 30 मई 2024 को एसीबी ने ट्रैप बिछाया। अम्बिकापुर के मुख्य डाकघर स्थित पासपोर्ट सेवा केंद्र में आरोपी संकट मोचन राय को इसरार हुसैन से 8 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया गया।
अदालत में पेश हुआ मामला
एसीबी ने आरोपी के खिलाफ धारा 7, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018)के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की। विवेचना पूरी होने के बाद 25 जुलाई 2024 को विशेष न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया।
अदालत का निर्णय
लगभग डेढ़ वर्ष चली सुनवाई के बाद 29 नवंबर 2025 को विशेष न्यायालय, अम्बिकापुर ने आरोपी को दोषी ठहराया।अदालत ने 3 वर्ष का कठोर कारावास की सजा के साथ
5,000 रुपये का अर्थदंड भी देने का आदेश दिया। रिश्वत प्रकरण में यह फैसला प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई को एक मजबूत संदेश माना जा रहा है



