
अम्बिकापुर: छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद बीते दिनों पहली बार सरगुजा का दौरा किया। लेकिन भूपेश दौरे के बाद से यहां की राजनीति गरमा गई है। कहा जा रहा है कि टीएस सिंहदेव के करीबी नेता और कार्यकर्ता अब निशाने पर आ गए हैं। स्थिति तब सामने आई, जब पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के समर्थकों ने ऐसे कांग्रेसजनों को एक व्हाट्सएप ग्रुप से बाहर कर दिया। वहीं, अब टीएस सिंहदेव भूपेश बघेल के कार्यक्रम में नहीं जाने और भूपेश बघेल और अपने रिश्ते को लेकर खुलकर बात की है।
सिंहदेव को नहीं मिली भूपेश बघेल के कार्यक्रम की जानकारी
- टीएस सिंहदेव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि भूपेश बघेल के कार्यक्रम के दौरान मैं व्यक्तिगत कारणों से बाहर था, जिसके चलते मैं कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाया।
- पहले हर बार भूपेश बघेल के कार्यक्रम की सूचना मिलती थी, लेकिन इस बार सूचना नहीं मिली थी। दोनों के रिश्ते को लेकर उन्होंने कहा कि कोई ऐसी वैसी बात नहीं है, राजनीतिक जोड़ घटाव है वो तो चलता रहता है।
क्या अभी भी है दोनों के बीच मलाल?
- टीएस सिंहदेव ने राजनीति में भूपेश बघेल और अपने कॉम्पिटिशन को लेकर कहा कि कोई कॉम्पटीटर जैसी बात नही हैं। जो बातें पहले सामने आई थी वो अब खत्म हो गई है।
- उन्हें काम करने का मौका मिला और मुझे मौका मिल सकता है। दोनों के रिश्तों में खटास की जो बातें थी उसने कांग्रेस को नुकसान तो पहुंचाया है, लेकिन अब ये स्थिति दोबारा नहीं आएगी।
कांग्रेस की हार की असली वजह क्या थी?
- उन्होंने कांग्रेस की हार पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भूपेश-सिंहदेव के रिश्तों में खटास कांग्रेस की हार की असली वजह नहीं है, ये मामला तो हार में सिर्फ 5 प्रतिशत का था।
- भूपेश बघेल के साथ पहले भी काम करते थे और आगे भी करते रहेंगे। छत्तीसगढ़ में कोई सिंगल लीडर नहीं है, सामूहिक लीडरशिप की बात होगी।
- मैं ही कप्तान रहूंगा तभी खेलूंगा ऐसी बात नहीं है। 2018 में भी सामूहिक लीडरशिप से ही सफलता मिली थी और आगे भी सामूहिक लीडरशिप की बात होगी।
चैतन्य बघेल की राजनीति में होगी एंट्री?
बता दें कि टीएस सिंहदेव ने हाल ही में चैतन्य बघेल की राजनीति में एंट्री को लेकर कहा था कि राजनीतिक के दरवाजे सभी के लिए खुले हुए हैं। अगर आप बड़े नेता से जुड़े हुए हैं उनके पुत्र हो रिश्तेदार हो तो आपको मौका मिल सकता है, लेकिन जनता की स्वीकारोक्ति होना चाहिए। वहीं, उन्हों ने आगे कहा कि कानून के प्रावधानों का दुरुपयोग करके हमारे नेताओं को जेल के अंदर भेजा गया है अब तक उन पर आरोप सिद्ध नहीं हुआ है। ऐसे में ये इस बात का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि जनता चैतन्य बघेल को स्वीकारेगी या नहीं।



