गरुड़ पुराण का रहस्य, बेटियों का जन्म सिर्फ संयोग नहीं ?

सनातन धर्म के ग्रंथों में जीवन और मृत्यु के चक्र को बहुत बारीकी से समझाया गया है। अक्सर समाज में यह सवाल उठता है कि किसी के घर बेटे का जन्म क्यों होता है और किसी के घर बेटी का? गरुड़ पुराण के अनुसार, यह कोई रैंडम प्रक्रिया नहीं है। यह पूरी तरह से जीव के पिछले कर्मों और मृत्यु के समय उसकी चेतना पर निर्भर करता है।
पुण्य कर्मों का स्कोरकार्ड: क्यों मिलती है बेटी?
गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु और पक्षीराज गरुड़ के बीच संवाद का वर्णन है। इसमें बताया गया है कि आत्मा का अगला शरीर कैसा होगा, यह उसके संचित कर्मों से तय होता है।
- संस्कारों का प्रभाव: जिन माता-पिता ने अपने पिछले जन्मों में निस्वार्थ सेवा और दान किया होता है, उनके घर लक्ष्मी स्वरूपा बेटी का आगमन होता है।
- पितृ ऋण से मुक्ति: बेटी का जन्म घर में पितृ ऋण की समाप्ति और कुल की शुद्धता का संकेत माना जाता है।
- अंतिम विचार: गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के समय व्यक्ति के मन में जो विचार प्रबल होते हैं, उसी के अनुसार अगले जन्म की योनि और लिंग निर्धारित होता है।
भगवान विष्णु का संदेश
गरुड़ पुराण में स्पष्ट किया गया है कि बेटियां केवल उन्हीं घरों में आती हैं, जिनमें उन्हें पालने और संस्कारित करने की क्षमता होती है। यह ‘चयन’ ईश्वरीय शक्तियों द्वारा किया जाता है।
गरुड़ पुराण का रहस्य: बेटियों का जन्म सिर्फ संयोग नहीं, किस्मत
“बेटियों का जन्म उस घर के सौभाग्य को दर्शाता है जहां सात्विक ऊर्जा का वास होता है। इन्हें केवल संतान नहीं, बल्कि मुक्ति का द्वार माना गया है।
— गरुड़ पुराण (अंश)
इसका अर्थ क्या है?
आधुनिक संदर्भ में देखें तो गरुड़ पुराण की ये बातें सामाजिक संतुलन और स्त्री शक्ति के सम्मान पर जोर देती हैं। यह ग्रंथ साफ करता है कि बेटी का जन्म कोई बोझ नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक पुरस्कार है। यह माता-पिता के धैर्य और उनके पवित्र आचरण की परीक्षा भी है और फल भी।शास्त्रों का यह ज्ञान आज के दौर में भी प्रासंगिक है, जो हमें बताता है कि परिवार में लिंग का निर्धारण केवल जैविक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक गहरे कर्मिक संतुलन का हिस्सा है। जिस घर में बेटी की किलकारी गूंजती है, वहां वास्तव में सकारात्मक शक्तियों का संचार होता है।



