छत्तीसगढ़रायपुर

इस सीनियर IPS को मिलेगी ‘पुलिस कमिश्नर’ की कमान?.. SSP लाल उमेद हो सकते है ज्वाइंट कमिश्नर..

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पहली बार पुलिस आयुक्त यानी कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने जा रहा है। रायपुर पहला जिला होगा, जिसकी कमान पुलिस आयुक्त के हाथों में होगी। पिछली कैबिनेट बैठक में बताया गया था कि इसी महीने 23 तारीख से रायपुर में यह नई पुलिस-प्रशासनिक प्रणाली लागू कर दी जाएगी। संभावना है कि इसके बाद बिलासपुर, दुर्ग जैसे बड़े जिलों में भी यह प्रणाली लागू की जा सकती है।

लागू होगा भोपाल मॉडल? 

इस बीच खबर है कि छत्तीसगढ़ के गृह विभाग ने कमिश्नरी कमेटी के प्रस्ताव को दरकिनार कर दिया है। इसके अलावा विभाग ने रायपुर में कमिश्नरी सिस्टम का नया ड्राफ्ट भी तैयार कर लिया है। पहले जानकारी मिली थी कि कमिश्नरी कमेटी ने भुवनेश्वर मॉडल को आदर्श मानते हुए रायपुर में लागू करने की सिफारिश की थी, लेकिन अब गृह विभाग ने भुवनेश्वर की बजाय भोपाल कमिश्नरी सिस्टम को लागू करने का मन बनाया है।इसका कारण यह है कि भुवनेश्वर में पुलिस कमिश्नर को 22 से अधिक मजिस्ट्रियल अधिकार दिए गए हैं, जो पहले जिला प्रशासन के पास होते थे। वहीं भोपाल पुलिस कमिश्नरी सिस्टम में पुलिस कमिश्नर को केवल 10–12 अधिकार ही मिले हैं और वहां अधिकतर अधिकार आज भी जिला प्रशासन के पास ही हैं। इसी वजह से रायपुर में भुवनेश्वर मॉडल अपनाने की तैयारी की गई थी।

दरअसल, रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू करने के लिए शासन ने पिछले वर्ष एडीजी प्रदीप गुप्ता के नेतृत्व में 8 सदस्यीय कमेटी बनाई थी। इस कमेटी ने मुंबई, दिल्ली, नागपुर, कानपुर, वाराणसी, जयपुर, भुवनेश्वर और भोपाल के पुलिस कमिश्नरी सिस्टम का अध्ययन किया। रायपुर की भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या, पुलिस बल और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए एक सरल, कम खर्चीला और प्रभावी मॉडल तैयार किया गया और उसकी रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी गई।

कमेटी की रिपोर्ट में भुवनेश्वर पुलिस कमिश्नरी सिस्टम को रायपुर के लिए सबसे उपयुक्त बताया गया। कमेटी ने सुझाव दिया कि पुलिस कमिश्नर को 22 मजिस्ट्रियल अधिकार दिए जाएं, जो अभी जिला प्रशासन के पास हैं। इनमें छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA), सार्वजनिक उपद्रव रोकने के लिए धारा 133 और गिरफ्तारी से जुड़े अधिकार शामिल हैं।

भुवनेश्वर पुलिस कमिश्नरी सिस्टम में ओडिशा सरकार ने पुलिस कमिश्नर को गन लाइसेंस जारी करने, आबकारी लाइसेंस देने, जिला बदर करने और एनएसए लगाने जैसे बड़े अधिकार दिए हैं। पूरे भुवनेश्वर जिले में यह व्यवस्था लागू है। इसके मुकाबले भोपाल पुलिस कमिश्नरी सिस्टम में पुलिस कमिश्नर को सीमित अधिकार ही दिए गए हैं। वहां गन लाइसेंस और आबकारी लाइसेंस जारी करने का अधिकार जिला प्रशासन के पास है। पुलिस कमिश्नर को केवल धारा 144 लागू करने, धारा 151, 107, 116 की कार्रवाई और जिलाबदर जैसे करीब 10 अधिकार ही प्राप्त हैं।

कमेटी ने जिन 22 कानूनों के तहत अधिकार देने की अनुशंसा की थी, उनमें छत्तीसगढ़ पुलिस अधिनियम 2007, कैदी अधिनियम 1900, विष अधिनियम 1919, अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम 1956, मोटर वाहन अधिनियम 1988, गैरकानूनी गतिविधियां अधिनियम 1967, छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम 1923, पशु अतिक्रमण अधिनियम 1871, राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980, शस्त्र अधिनियम 1959, विस्फोटक अधिनियम 1884, छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम 1915 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1980 जैसे प्रमुख कानून शामिल हैं।

हाई-लेवल कमिटी ने सौंपी थी रिपोर्ट 

गौरतलब है कि राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू करने के लिए अक्टूबर महीने में एक प्रारूप तैयार किया गया था। यह प्रारूप एक उच्च स्तरीय समिति द्वारा तैयार किया गया था और इसे राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अरुण देव गौतम को सौंपा गया था। समिति ने भुवनेश्वर कमिश्नरी मॉडल को बेहतर मानते हुए इसके लगभग 60 प्रतिशत नियमों को रायपुर में लागू करने का निर्णय लिया था। शेष 40 प्रतिशत नियम महाराष्ट्र, दिल्ली, कोलकाता, हैदराबाद, ओडिशा, राजस्थान और मध्यप्रदेश में लागू मॉडलों से लेने का फैसला किया गया था। हालांकि अब इसमें बड़े फेरबदल की संभावना जताई जा रही है।

कौन होगा रायपुर का पहला पुलिस आयुक्त?

भले ही 23 जनवरी से रायपुर में आयुक्त प्रणाली लागू होने जा रही हो, लेकिन अब तक सरकार की ओर से यह तय नहीं किया गया है कि रायपुर का पहला पुलिस कमिश्नर कौन होगा। चूंकि पुलिस कमिश्नर आईजी स्तर का पद होता है, इसलिए इस रेस में अजय यादव, बद्रीनारायण मीणा, रायपुर आईजी अमरेश मिश्रा, बिलासपुर आईजी संजीव शुक्ला, राजनांदगांव आईजी अभिषेक शांडिल्य, सरगुजा आईजी दीपक झा जैसे बड़े नाम शामिल हैं।  सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रामगोपाल गर्ग को रायपुर का पहला पुलिस कमिश्नर बनाए जाने की संभावना है। रामगोपाल गर्ग वर्तमान में दुर्ग में आईजी के पद पर पदस्थ हैं और इससे पहले वे सरगुजा में तैनात रह चुके हैं। हालांकि स्वच्छ छवि वाले रामगोपाल गर्ग को लेकर अंतिम फैसला प्रदेश का गृह विभाग ही लेगा।

नई प्रणाली लागू होने के बाद संयुक्त पुलिस आयुक्त (JCP) और सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) की भी तैनाती की जाएगी। पुलिस कमिश्नर के बाद दूसरा महत्वपूर्ण पद ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर का होता है। ऐसे में मौजूदा एसएसपी लाल उमेद सिंह के नाम पर मुहर लग सकती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button