
बालोद, छत्तीसगढ़ के बालोद में आयोजित कुर्मी क्षत्रीय समाज के प्रथम वार्षिक सम्मेलन के दौरान उस वक्त सियासी भूचाल आ गया, जब मंच से बोल रहे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भाषण के बीच राजनीतिक बातें न करने की नसीहत दे दी गई। इस टोके जाने से नाराज़ भूपेश बघेल का तेवर अचानक बदल गया और उन्होंने मंच से ही कड़े शब्दों में विरोध दर्ज कराया। भूपेश बघेल ने साफ कहा कि किसानों की बात करना राजनीति नहीं, बल्कि हक की आवाज उठाना है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा—अगर किसानों के दर्द पर बोलना राजनीति है, तो फिर ऐसी राजनीति मैं करता रहूंगा। उनका यह बयान सुनते ही सभा में मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं, जबकि मंच पर बैठे कुछ लोग असहज नजर आए और कुछ देर के लिए सन्नाटा पसर गया।
जानकारी के मुताबिक, एक दिन पहले बालोद के सरदार पटेल मैदान में छत्तीसगढ़ कुर्मी क्षत्रीय समाज का प्रथम वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में भूपेश बघेल को अति विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। भाषण के दौरान वे किसानों की बदहाल स्थिति और सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे थे, तभी मंच से ही उन्हें राजनीति से दूर रहने की नसीहत दी गई। इसके बाद भूपेश बघेल और आक्रामक हो गए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कार्यक्रम में दूसरे राजनीतिक दलों से जुड़े लोग भी मौजूद हैं, जिन्हें उनकी बातें चुभ रही हैं। कुछ लोगों को मिर्ची लग रही है, लेकिन वे खुलकर बोल नहीं पा रहे। इस बयान के बाद सभा स्थल पर तनाव का माहौल बन गया और कई चेहरों पर असहजता साफ दिखाई दी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आयोजकों को भी स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि अगर सामाजिक मंचों पर सच्चाई और किसानों के मुद्दे उठाने से परेशानी होती है, तो भविष्य में उन्हें ऐसे कार्यक्रमों में बुलाने की जरूरत नहीं है। इस घटनाक्रम के बाद कुछ देर के लिए कार्यक्रम स्थल पर हड़कंप मच गया और आयोजकों को बीच-बचाव कर माहौल संभालना पड़ा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बालोद की यह घटना सिर्फ मंचीय विवाद नहीं, बल्कि आने वाले चुनावी माहौल में सामाजिक मंचों पर बढ़ती सियासी खींचतान का साफ संकेत है। भूपेश बघेल का यह रुख कांग्रेस की आक्रामक राजनीति के तौर पर देखा जा रहा है।



