
रायपुर । छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शनिवार देर रात जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में लगी भीषण आग ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस आगजनी में शिक्षा विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जलकर पूरी तरह नष्ट हो गए। घटना के बाद जहां एक ओर जांच के आदेश दिए गए हैं, वहीं दूसरी ओर इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
इस मामले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के बयान ने सियासी माहौल को और गरमा दिया। अजय चंद्राकर ने कहा कि “मोहब्बत और भ्रष्टाचार कभी खत्म नहीं होते, केवल बाबू बदलते हैं।” उनके इस बयान को लेकर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने पलटवार करते हुए कहा कि चंद्राकर के बयान ने खुद उनकी सरकार के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार पर मुहर लगा दी है।
दीपक बैज ने आरोप लगाया कि “जग खरीदी से लेकर जंबूरी तक भ्रष्टाचार फैला हुआ है। अजय चंद्राकर ने इस तरह का बयान देकर अपनी ही सरकार के कार्यों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।” उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील विभाग में दस्तावेजों का इस तरह जल जाना केवल एक संयोग नहीं हो सकता, बल्कि इसकी गहन जांच होनी चाहिए। घटना शनिवार देर रात की है, जब जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय परिसर में स्थित भंडार गृह से अचानक धुआं उठता देखा गया। कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप ले लिया। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। हालांकि तब तक आग अपना काम कर चुकी थी और भंडार गृह में रखे अधिकांश दस्तावेज जलकर राख हो चुके थे।
बताया जा रहा है कि जिस भंडार गृह में आग लगी, वहां रायपुर जिले के शिक्षकों के सर्विस रिकॉर्ड सुरक्षित रखे गए थे। इसके अलावा निजी स्कूलों की मान्यता से संबंधित फाइलें, मध्यान्ह भोजन योजना से जुड़े दस्तावेज, छात्रवृत्ति संबंधी रिकॉर्ड और सरकारी स्कूलों के कई अहम कागजात भी उसी स्थान पर रखे हुए थे। इन दस्तावेजों के नष्ट होने से शिक्षा विभाग के कामकाज पर बड़ा असर पड़ सकता है। घटना की गंभीरता को देखते हुए लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने तत्काल तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। रायपुर के संयुक्त संचालक संजीव श्रीवास्तव को इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि सहायक संचालक बजरंग प्रजापति और सतीश नायर को सदस्य नियुक्त किया गया है। समिति को 5 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
इस बीच यह सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या यह आगजनी केवल एक हादसा थी या फिर इसके पीछे कोई साजिश है। महत्वपूर्ण दस्तावेजों के एक ही स्थान पर जलने से संदेह और गहरा गया है। विपक्ष ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।



