करमा मे चल रहे सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा का हुआ समापन

करमा मे चल रहे सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा का हुआ समापन
रवि कुमार तिवारी,
भैंसा : श्रीमद भागवत महापुराण के सातवें दिन की कथा मुख्य रूप से सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष और भगवान नाम संकीर्तन पर केंद्रित होती है, जो कथा के समापन का प्रतीक है; इस दिन भगवान कृष्ण और उनके बचपन के मित्र सुदामा की घनिष्ठ मित्रता, सुदामा की दरिद्रता और कृष्ण द्वारा उन्हें धनवान बनाने की लीला का वर्णन होता है, जिसके बाद राजा परीक्षित के मोक्ष की कथा सुनाई जाती है और अंत में भव्य भंडारा व प्रसाद वितरण के साथ कथा का समापन होता है, जिससे भक्तों को आध्यात्मिक शांति और ईश्वर से जुड़ने का अनुभव होता है।
सातवें दिन की प्रमुख कथाएँ:
सुदामा चरित्र: यह कथा भगवान कृष्ण और उनके बाल llसखा सुदामा की अद्भुत मित्रता को दर्शाती है, जहाँ सुदामा गरीबी में भी कृष्ण से मिलने आते हैं और कृष्ण उन्हें गले लगाकर कुबेर के समान धनवान बना देते हैं, जो सच्ची मित्रता और ईश्वर की कृपा का प्रतीक है।
परीक्षित मोक्ष: इस दिन राजा परीक्षित को सातवें दिन सर्प दंश से मृत्यु का श्राप मिला था, और शुकदेव मुनि द्वारा उन्हें सात दिनों तक भागवत कथा सुनाकर मोक्ष प्राप्त करने का मार्ग दिखाया गया था, जिसका वर्णन होता है।
भगवान नाम संकीर्तन: कथा के अंत में भगवान के नाम का जाप और संकीर्तन किया जाता है, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठता है और सभी भक्त आनंदित होकर नृत्य-गान करते हैं, जो कथा का अंतिम और महत्वपूर्ण भाग है।
समापन और भंडारा: सभी लीलाओं के वर्णन के बाद, हवन-पूर्णाहुति होती है और विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें सभी श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं और कथा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होती है।
महत्व:
यह दिन भक्तों को जीवन के अंतिम सत्य और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का संदेश देता है।
सुदामा चरित्र से मित्रता और प्रेम का महत्व, और परीक्षित मोक्ष से आत्मज्ञान का मार्ग सिखाया जाता है।
कथा का समापन हरि नाम संकीर्तन से होता है, जो सभी दुखों से मुक्ति दिलाता है।अंत मे आचार्य पंड़ित रोहित तिवारी ने बताया की दिंनाँक 22/01/26 दिन गुरुवार को भागवत पूर्णाहुति, हवन, तुलसी वर्षा, कपिलतर्पण, एवं भंडारा प्रसाद वितरण रखा गया है जिसमे सभी मानव समाज सादर आमंत्रित है



