धार्मिक

फाल्गुन है खास, शास्त्रों में इस मास को क्यों कहा गया आनंद का महीना?

धार्मिक : हिंदू पंचांग में फाल्गुन मास को केवल एक तिथि नहीं, बल्कि आनंद, उल्लास और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक माना गया है. वर्ष 2026 में फाल्गुन मास का आरंभ 2 फरवरी से हुआ है, जो माघ पूर्णिमा के पश्चात प्रारंभ हुआ है. शास्त्रों के अनुसार, यह वह समय होता है जब प्रकृति के साथ-साथ मन और आत्मा भी नए जीवन का अनुभव करते हैं. सर्दी की विदाई और वसंत की शुरुआत के साथ जीवन में एक अलग ही ताजगी महसूस होती है. इसी कारण से फाल्गुन को आनंद का महीना कहा गया है. धार्मिक रूप से यह भक्ति और प्रेम का संदेश देता है, वहीं सामाजिक रूप से आपसी मेल-मिलाप और खुशियों को बढ़ाता है।

शास्त्रों के अनुसार, फाल्गुन मास में प्रकृति अपने सबसे कोमल और सुंदर रूप में नजर आती है. मौसम में हल्की सी नरमी आ जाती है, हवाएं सुहानी चलने लगती हैं और इसका सीधा असर मनुष्य के मन पर पड़ता है. पद्म पुराण में बताया गया है कि फाल्गुन मास में देवता भी आनंद रूप में पृथ्वी पर विचरण करते हैं. इस समय मन अपने आप प्रसन्न रहता है और प्रेम व करुणा जैसे भाव सहज ही जागृत हो जाते हैं. ठंड का असर कम होने से शरीर और मन दोनों में हल्कापन महसूस होता है. इसी वजह से शास्त्रों में फाल्गुन मास को मानसिक और आत्मिक आनंद देने वाला महीना माना गया है।

फाल्गुन मास और वसंत ऋतु का गहरा संबंध

फाल्गुन मास का सबसे बड़ा सौंदर्य इसका वसंत ऋतु से जुड़ा है. शास्त्रों में वसंत को ऋतुओं का राजा कहा गया है और फाल्गुन को उसका स्वागतकर्ता माना जाता है. चारों ओर खिलते फूल, पेड़ों पर नई पत्तियां और वातावरण में बिखरी सुगंध मन को आनंद से भर देती है. स्कंद पुराण के अनुसार, वसंत ऋतु में की गई भक्ति और साधना मन को जल्दी स्थिर करती है. यही कारण है कि फाल्गुन में व्यक्ति अधिक सहजता से प्रेम, भक्ति और आनंद का अनुभव करता है. प्रकृति का यह सौंदर्य मन के विकारों को शांत कर भीतर से प्रसन्नता देता है।

शास्त्रों में फाल्गुन मास के प्रमुख पर्व और आनंद तत्व

फाल्गुन मास में आने वाले पर्व इसकी आनंदमयी भावना को और भी गहरा कर देते हैं. महाशिवरात्रि और होली जैसे बड़े पर्व इसी महीने में मनाए जाते हैं. शास्त्रों में बताया गया है कि ये पर्व व्यक्ति को अपने भीतर के भय, द्वेष और नकारात्मक भावों से मुक्त होने का अवसर देते हैं. फाल्गुन में मनाया गया उत्सव केवल बाहर की खुशी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि भीतर की शुद्धि का माध्यम भी बनता है. रंगों की उमंग, भक्ति का भाव और मन का उल्लास इन तीनों का मेल फाल्गुन मास को खास और यादगार बना देता है।

फाल्गुन मास में साधना और जीवन पर प्रभाव

शास्त्रों के अनुसार फाल्गुन मास साधना और जीवन में संतुलन बनाने के लिए बहुत शुभ माना गया है. इस समय किया गया जप, ध्यान और दान मन को जल्दी शांति देता है. फाल्गुन में मनुष्य भावनात्मक रूप से अधिक सहज और सकारात्मक रहता है, जिससे साधना का असर भी गहरा होता है. मान्यता है कि इस मास में किया गया हर पुण्य कर्म आनंद बनकर लौटता है. इसी कारण फाल्गुन को केवल उत्सवों का ही नहीं, बल्कि भीतर के आनंद और आत्मिक जागरण का महीना कहा गया है. यही वजह है कि शास्त्रों में फाल्गुन मास को विशेष महत्व दिया गया है।

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