धार्मिक

वैवाहिक सुख और समृद्धि के लिए इस विधि से करें मां सीता की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

धार्मिक : पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जानकी जयंती (सीता अष्टमी) का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। साल 2026 में यह उत्सव 10 फरवरी, मंगलवार को पड़ रहा है। मान्यता है कि इसी दिन माता सीता का प्राकट्य धरती से हुआ था। धार्मिक दृष्टिकोण से यह दिन महिलाओं के अखंड सौभाग्य और कुंवारी कन्याओं के लिए मनचाहा वर प्राप्त करने के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।

पूजन की संपूर्ण विधि

जानकी जयंती के दिन सुहागिन महिलाएं अपने परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। शास्त्रसम्मत विधि इस प्रकार है:

स्नान और संकल्प: सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि के बाद पीले या लाल वस्त्र धारण करें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।

स्थापना: घर के मंदिर या किसी साफ स्थान पर लकड़ी की चौकी रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं। भगवान राम और माता सीता की प्रतिमा को आमने-सामने या साथ स्थापित करें।

अभिषेक: प्रतिमाओं को पहले गंगाजल और उसके बाद दूध, दही, घी, शहद व शक्कर के मिश्रण यानी पंचामृत से स्नान कराएं।

श्रृंगार और अर्पण: माता सीता को सुहाग की सामग्री (बिंदी, चूड़ी, मेहंदी आदि) भेंट करें। इस दिन मां को सिंदूर चढ़ाना विशेष फलदायी होता है।

भोग: पूजा में पीले फल और फूल अर्पित करें। मां को घर में बना शुद्ध सूजी का हलवा या केसरिया भात का भोग लगाना शुभ माना जाता है।

आरती और क्षमा प्रार्थना: घी का दीपक जलाकर ‘राम-सिया’ के भजनों का आनंद लें। अंत में जानकी माता की आरती करें और पूजा में अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें।

नारी शक्ति और वैवाहिक सुख का प्रतीक

जानकी जयंती का महत्व केवल कर्मकांडों तक सीमित नहीं है। विद्वानों के अनुसार, यह दिन नारी शक्ति, त्याग और पवित्रता के प्रति सम्मान प्रकट करने का अवसर है।

माता सीता का जीवन धैर्य और संयम की पराकाष्ठा है। इस दिन व्रत रखने से दांपत्य जीवन के कलह शांत होते हैं और घर में शांति का वास होता है।” — आचार्य रामदत्त शास्त्री, स्थानीय ज्योतिषाचार्य

कष्टों से मुक्ति के लिए विशेष उपाय

यदि आप लंबे समय से आर्थिक तंगी या वैवाहिक जीवन में तनाव का सामना कर रहे हैं, तो ज्योतिषाचार्यों ने इस दिन के लिए विशेष समाधान बताए हैं:

श्रद्धालुओं को इस दिन जानकी स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। पूजा संपन्न होने के बाद श्रृंगार की सामग्री किसी जरूरतमंद विवाहित महिला को दान करने से मां जानकी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

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