संतान की बाधाएं होंगी दूर, आज बन रहा है बेहद शुभ संयोग; जानें सटीक पूजा विधि और उपाय

धार्मिक : आज देशभर में माता यशोदा का जन्मोत्सव यानी यशोदा जयंती मनाई जा रही है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व ममता और वात्सल्य का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज के दिन मां यशोदा और बाल गोपाल की विशेष पूजा अर्चना करने से संतान पक्ष से जुड़ी तमाम समस्याएं जैसे—बार-बार बीमार पड़ना, पढ़ाई में मन न लगना या जिद्दी व्यवहार—से मुक्ति मिलती है।
शुभ मुहूर्त और विशेष योग
ज्योतिष गणना के अनुसार, इस साल यशोदा जयंती पर सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। षष्ठी तिथि 7 फरवरी को सुबह 01:18 बजे शुरू हो चुकी है और यह 8 फरवरी की सुबह 02:54 बजे तक रहेगी। पूजा के लिए सबसे उत्तम समय सुबह 07:05 बजे तक का था, हालांकि पूरे दिन श्रद्धा भाव से पूजा की जा सकती है।
इन विशेष उपायों से दूर होंगे संतान के दोष
अगर आप अपने बच्चे के भविष्य या स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं, तो आज के दिन ये उपाय अत्यंत फलदायी माने जाते हैं:
नजर दोष के लिए: यदि बच्चे को बार-बार नजर लगती है, तो मैया यशोदा को काली गुंजा या काला धागा अर्पित करें। पूजा के बाद इसे बच्चे की कलाई पर बांधने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है।
एकाग्रता और पढ़ाई: जो बच्चे पढ़ाई में कमजोर हैं, उनके हाथों से आज जरूरतमंद बच्चों को सफेद मिठाई या दूध का दान करवाएं।
स्वास्थ्य रक्षा: बीमार रहने वाले बच्चों के लिए माता यशोदा के चरणों में केसर चढ़ाएं और उसका तिलक नियमित रूप से बच्चे के माथे पर लगाएं।
“यशोदा जयंती केवल एक व्रत नहीं, बल्कि मां और संतान के अटूट विश्वास का पर्व है। आज के दिन किया गया ‘ॐ देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते’ मंत्र का जाप निसंतान दंपत्तियों के लिए भी चमत्कारी सिद्ध होता है।” — पंडित आनंद पाठक, ज्योतिषाचार्य
मथुरा-वृंदावन में भारी उत्साह
ब्रज क्षेत्र, विशेषकर गोकुल और नंदगांव में आज सुबह से ही मंदिरों में ‘बधाइयां’ गाई जा रही हैं। स्थानीय प्रशासन ने दर्शनार्थियों की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। गोकुल स्थित यशोदा मैया के मंदिर में विशेष पंचामृत अभिषेक का आयोजन किया गया है, जिसमें शामिल होने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचे हैं।



