अब UPI से तत्काल निकलेगा EPFO का पैसा.. क्लेम, एप्रूवल और लम्बे इंतज़ार का झंझट ख़त्म, App भी होगा लांच

नई दिल्ली: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़े करोड़ों कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर है। अब सदस्य अपने पीएफ (EPF) का पैसा सीधे यूपीआई के जरिए अपने बैंक खाते में ट्रांसफर कर सकेंगे। इसके लिए सरकार अप्रैल में एक नया मोबाइल ऐप लॉन्च करने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, श्रम मंत्रालय एक ऐसी व्यवस्था पर काम कर रहा है, जिसमें ईपीएफ की तय राशि को यूपीआई पेमेंट गेटवे के जरिए निकाला जा सकेगा। यानी सदस्य फोनपे, पेटीएम या अन्य यूपीआई ऐप के माध्यम से अपने लिंक बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर कर पाएंगे।
नए ऐप से मिलेंगी कई सुविधाएं
ईपीएफओ एक नया समर्पित मोबाइल ऐप लॉन्च करेगा। इस ऐप के जरिए सदस्य अपना पीएफ बैलेंस देख सकेंगे, पासबुक की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और पात्र राशि को सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर कर सकेंगे। लेन-देन पूरा करने के लिए सदस्यों को अपने लिंक किए गए यूपीआई पिन का उपयोग करना होगा, जिससे सुरक्षित ट्रांजैक्शन सुनिश्चित होगा। फिलहाल सदस्य अपने ईपीएफ खाते की सेवाओं के लिए यूएएन पोर्टल या उमंग ऐप का इस्तेमाल करते हैं। ये सेवाएं आगे भी उपलब्ध रहेंगी, लेकिन नया ऐप प्रक्रिया को और आसान और तेज बनाएगा
100 डमी खातों पर चल रहा परीक्षण
सूत्रों के अनुसार, ईपीएफओ इस नई सुविधा का परीक्षण 100 डमी खातों पर कर रहा है, ताकि किसी भी तकनीकी समस्या को पहले ही दूर किया जा सके। अप्रैल में इस ऐप को औपचारिक रूप से लॉन्च किए जाने की संभावना है।
निकासी प्रक्रिया होगी आसान
अभी सदस्यों को पीएफ निकालने के लिए क्लेम फाइल करना पड़ता है, जो समय लेने वाली प्रक्रिया है। हालांकि ऑटो-सेटलमेंट मोड के तहत 5 लाख रुपये तक के दावे तीन दिनों के भीतर निपटाए जा रहे हैं। पहले यह सीमा 1 लाख रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है। इससे बीमारी, शिक्षा, शादी और घर जैसे जरूरी कामों के लिए लोगों को जल्दी पैसा मिल पाता है।
हर साल 5 करोड़ से ज्यादा दावे
ईपीएफओ के लगभग 8 करोड़ सदस्य हैं। हर साल 5 करोड़ से अधिक क्लेम निपटाए जाते हैं, जिनमें ज्यादातर पीएफ निकासी के होते हैं। इसी बोझ को कम करने और प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए नई यूपीआई आधारित प्रणाली तैयार की जा रही है।
हालांकि, ईपीएफओ के पास बैंकिंग लाइसेंस नहीं है, इसलिए वह सीधे खाते से पैसा नहीं निकाल सकता। लेकिन सरकार ईपीएफओ की सेवाओं को बैंकों के बराबर आधुनिक और सुविधाजनक बनाने की दिशा में काम कर रही है। ऑटो-सेटलमेंट मोड के तहत, निकासी दावों का निपटान आवेदन पत्र जमा करने के तीन दिनों के भीतर मैन्युअल हस्तक्षेप के बिना इलेक्ट्रॉनिक रूप से किया जाता है। इस ऑटो-सेटलमेंट मोड की सीमा पहले ही मौजूदा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है। इससे बड़ी संख्या में ईपीएफओ सदस्यों को बीमारी, शिक्षा, विवाह और आवास उद्देश्यों के लिए तीन दिनों के भीतर अपने ईपीएफ धन तक पहुंचने में सुविधा मिलती है।
लगभग 8 करोड़ सदस्यों वाले ईपीएफओ ने कोविड-19 महामारी के दौरान वित्तीय संकट से जूझ रहे लोगों को त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए अग्रिम दावों के ऑनलाइन स्व-निपटान की शुरुआत की थी।हालांकि, सभी सदस्यों को अपने ईपीएफ से निकासी के लिए दावा दाखिल करना पड़ता है। इस समय लेने वाली प्रक्रिया से बचने और ईपीएफओ पर बोझ कम करने के लिए नई प्रणाली विकसित की जा रही है, क्योंकि हर साल 5 करोड़ से अधिक दावे, जिनमें ज्यादातर ईपीएफ निकासी के लिए होते हैं, निपटाए जाते हैं। सूत्र ने बताया कि ईपीएफओ अपने सदस्यों को सीधे ईपीएफ खातों से पैसे निकालने की अनुमति नहीं दे सकता क्योंकि उसके पास कोई बैंकिंग लाइसेंस नहीं है। हालांकि, सूत्र ने कहा कि सरकार ईपीएफओ सेवाओं को बैंकों के बराबर लाने के लिए उनमें सुधार करना चाहती है।



