क्राइमछत्तीसगढ़

पत्नी के साथ पड़ोसी को बात करते देख भड़का पति, कुल्हाड़ी से काट डाला, अब कोर्ट ने सुनायी उम्रकैद की सजा

पत्नी के साथ पड़ोसी को बात करते देख भड़का पति, कुल्हाड़ी से काट डाला, अब कोर्ट ने सुनायी उम्रकैद की सजा

पेंड्रा। पेंड्रा क्षेत्र में चर्चित रहे हत्या प्रकरण में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी को आजीवन कारावास की सजा दी है। यह निर्णय द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एकता अग्रवाल की अदालत द्वारा सुनाया गया। मामला मरवाही थाना क्षेत्र के ग्राम कटरा के ललमटियाटोला का है, जहां 2 अप्रैल 2025 को दिनदहाड़े हत्या की वारदात हुई थी।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना के दिन मृतक महुआ बीनने के लिए जंगल क्षेत्र में गया हुआ था। इसी दौरान आरोपी आनंद चौधरी वहां पहुंचा और टंगिया (कुल्हाड़ी जैसे धारदार हथियार) से उस पर हमला कर दिया। हमले में गंभीर चोट लगने से मौके पर ही पीड़ित की मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी और ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया था।

जांच में सामने आया कि हत्या के पीछे पारिवारिक और व्यक्तिगत विवाद कारण बना। बताया गया कि आरोपी को इस बात को लेकर आपत्ति थी कि मृतक उसकी पत्नी से बातचीत करता था। इसी संदेह और नाराजगी ने धीरे-धीरे हिंसक रूप ले लिया। घटना के दिन दोनों के बीच कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते जानलेवा हमले में बदल गई।

मामले की सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घटनास्थल का मुआयना किया और साक्ष्य जुटाए। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ मजबूत केस तैयार किया गया। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया।

अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने घटना से जुड़े सभी तथ्यों और साक्ष्यों को विस्तार से रखा। गवाहों के बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट तथा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया। न्यायालय ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

फैसले के बाद स्थानीय लोगों ने न्यायिक प्रक्रिया पर संतोष व्यक्त किया। ग्रामीणों का कहना है कि इस निर्णय से समाज में कानून के प्रति विश्वास मजबूत होगा और ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि व्यक्तिगत विवाद और संदेह किस प्रकार भयावह परिणामों तक पहुंच सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे-छोटे विवादों को समय रहते संवाद और कानूनी उपायों के जरिए सुलझाना आवश्यक है, ताकि हिंसा जैसी घटनाओं से बचा जा सके।

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