फाल्गुन पूर्णिमा 2026: 3 मार्च को मनेगा पर्व, जानें शुभ मुहूर्त, सुकर्मा योग और चंद्र ग्रहण का प्रभाव

धार्मिक : सनातन धर्म में फाल्गुन पूर्णिमा का विशेष महत्व है, जो इस वर्ष 03 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। वैदिक पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 02 मार्च को शाम 05:55 बजे से होगी, जो अगले दिन 03 मार्च को शाम 05:07 बजे तक प्रभावी रहेगी। इसी दिन वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण भी लगने जा रहा है, हालांकि खगोल शास्त्रियों और ज्योतिषियों ने स्पष्ट किया है कि यह भारत में दृश्यमान नहीं होगा।
शुभ मुहूर्त और तिथियों का गणित
पंचांग गणना के अनुसार, फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि का विस्तार दो दिनों तक है। लेकिन उदयातिथि की मान्यता के कारण 03 मार्च को ही मुख्य पर्व और दान-पुण्य के कार्य किए जाएंगे। भक्तों के लिए सबसे महत्वपूर्ण ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:05 से 05:55 तक रहेगा। इस 50 मिनट के दुर्लभ काल में पवित्र नदियों में स्नान और लक्ष्मी-नारायण की आराधना का विधान है।
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 02 मार्च, शाम 05:55 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्ति: 03 मार्च, शाम 05:07 बजे
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:05 से 05:55 (03 मार्च)
सुकर्मा और शिववास योग का दुर्लभ संयोग
इस बार की पूर्णिमा धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी मानी जा रही है क्योंकि इस दिन सुकर्मा योग का निर्माण हो रहा है, जो सुबह 10:25 बजे तक रहेगा। इसके तुरंत बाद शाम 05:07 बजे से शिववास योग शुरू होगा। ज्योतिषियों का मानना है कि इन योगों में की गई पूजा से आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।
चंद्र ग्रहण: क्या लगेगा सूतक काल?
03 मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने वाला है, जिससे श्रद्धालुओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। हालांकि, स्पष्ट किया गया है कि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।
“चूंकि यह चंद्र ग्रहण भारत के क्षितिज पर दृश्यमान नहीं है, इसलिए इसका धार्मिक प्रभाव या सूतक काल मान्य नहीं होगा। श्रद्धालु बिना किसी भय के अपनी नियमित पूजा, सत्यनारायण कथा और लक्ष्मी पूजन संपन्न कर सकते हैं।” — पंडित आर. के. शर्मा, ज्योतिषाचार्य
आमजन के लिए क्या है खास?
फाल्गुन पूर्णिमा के दिन ही होलिका दहन की परंपरा भी जुड़ी होती है। प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर पार्कों और चौराहों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के निर्देश दिए हैं। श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे शाम 05:07 बजे से पहले स्नान और दान के कार्य पूर्ण कर लें। इस दिन लक्ष्मी-नारायण की पूजा के पश्चात अपनी क्षमता अनुसार सफेद वस्तुओं (जैसे दूध, चीनी, चावल) का दान करना विशेष फलदायी बताया गया है।



