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धान खरीदी पर गरमाया सदन, शून्यकाल में विपक्ष ने उठाया मुद्दा, पंजीयन के बाद भी नहीं खरीदा गया धान..

रायपुर । छत्तीसगढ़ विधानसभा में बजट सत्र के दौरान शून्यकाल में धान खरीदी का मुद्दा छाया रहा। विपक्षी विधायकों ने स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से सरकार पर तीखे आरोप लगाते हुए धान खरीदी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को प्रमुखता से उठाया।

नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने सदन में कहा कि राज्य के अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के कई किसानों का धान नहीं खरीदा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि धान खरीदी में जानबूझकर अनियमितताएं की गईं और पंजीयन के दौरान किसानों को भ्रमित किया गया। महंत ने कहा कि धान बेचने की उम्मीद में किसान पंजीयन केंद्रों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन खरीदी के समय उन्हें विभिन्न तकनीकी कारणों का हवाला देकर वापस लौटा दिया गया। उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “किसान खून के आंसू रो रहे हैं।” महंत ने यह भी टिप्पणी की कि “अंग्रेजों के समय भी किसानों को इतना गुमराह नहीं किया गया था।”

विपक्ष का आरोप था कि कई किसानों को पंजीयन प्रक्रिया के दौरान यह विश्वास दिलाया गया कि उनका धान निश्चित रूप से खरीदा जाएगा, लेकिन वास्तविक खरीदी के समय नियमों और शर्तों का हवाला देकर उन्हें वंचित कर दिया गया। इस मुद्दे पर कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) धारक किसानों का धान भी कई स्थानों पर नहीं खरीदा गया। उन्होंने कहा कि KCC धारक किसानों को प्राथमिकता मिलने की अपेक्षा थी, लेकिन उन्हें भी समस्याओं का सामना करना पड़ा।

उमेश पटेल ने किसानों की आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि धान खरीदी में बाधा आने से किसानों पर कर्ज का बोझ और बढ़ गया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि या तो किसानों की कर्ज माफी की जाए या धान खरीदी की प्रक्रिया को पुनः शुरू किया जाए। सदन में इस मुद्दे पर विपक्षी विधायकों ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। विपक्ष का कहना था कि धान खरीदी राज्य की अर्थव्यवस्था और किसानों के जीवन से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है, जिस पर सरकार को स्पष्ट और संतोषजनक जवाब देना चाहिए।

धान खरीदी को लेकर उठे इस विवाद ने एक बार फिर किसानों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। विपक्ष ने जहां सरकार पर किसानों के साथ अन्याय का आरोप लगाया, वहीं सरकार की ओर से अब तक इस पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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