जहां सांस लेना भी मुश्किल, वहां दौड़ते दिखे लोग, पैंगोंग झील पर आयोजित अनोखी मैराथन ने सबको चौंकाया

लेह : लद्दाख के दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में स्थित विश्वप्रसिद्ध पैंगोंग त्सो झील की जमी हुई सतह पर आयोजित पैंगोंग फ्रोजन लेक मैराथन 2026 का चौथा संस्करण उत्साह और रोमांच के साथ शुरू हुआ। अत्यधिक ऊंचाई और शून्य से कई डिग्री नीचे तापमान के बीच आयोजित इस अनूठी प्रतियोगिता में भारत के 21 राज्यों से आए धावकों के साथ संयुक्त अरब अमीरात, नेपाल और ऑस्ट्रेलिया के अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों ने भी हिस्सा लिया। बर्फीली झील पर दौड़ना दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण मैराथनों में गिना जाता है, जिसने एक बार फिर प्रतिभागियों की सहनशक्ति और मानसिक दृढ़ता की कठिन परीक्षा ली।
भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस ने लिया भाग
इस उच्च हिमालयी आयोजन में भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों की उल्लेखनीय भागीदारी विशेष आकर्षण रही। देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों ने न केवल साहसिक खेलों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई, बल्कि नागरिक प्रतिभागियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कठिन परिस्थितियों में दौड़ पूरी की। बर्फ से ढकी पहाड़ियां, तेज ठंडी हवाएं और ऑक्सीजन की कमी जैसे कारकों ने प्रतियोगिता को और चुनौतीपूर्ण बना दिया, फिर भी धावकों का उत्साह पूरे आयोजन में चरम पर रहा।
पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा देने का भी महत्वपूर्ण मंच
लेह-लद्दाख के मनमोहक लेकिन कठोर प्राकृतिक परिवेश में संपन्न यह मैराथन साहसिक पर्यटन और पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा देने का भी महत्वपूर्ण मंच बन चुकी है। आयोजकों के अनुसार, पैंगोंग फ्रोजन लेक मैराथन का उद्देश्य हिमालयी पारिस्थितिकी के संरक्षण का संदेश देना और क्षेत्र में सस्टेनेबल एडवेंचर टूरिज्म को प्रोत्साहित करना है। अंतरराष्ट्रीय भागीदारी और बढ़ती लोकप्रियता के साथ यह आयोजन अब वैश्विक साहसिक खेल कैलेंडर में अपनी खास पहचान बना रहा है।



