रसायनों को छोड़ पलाश की ओर, 3 मार्च को टेसू के संग मनेगी ‘प्राकृतिक होली’

नई दिल्ली : इस साल 3 मार्च 2026 को रंगों का पर्व होली पूरे देश में पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। लेकिन इस बार का उत्सव केवल रंगों तक सीमित नहीं है; पर्यावरणविदों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने रसायनों से होने वाले नुकसान को देखते हुए “बैक टू रूट्स” यानी अपनी जड़ों की ओर लौटने की अपील की है। बाजारों में बिकने वाले लेड और मरकरी युक्त सिंथेटिक रंगों के बजाय, इस साल पलाश (टेसू) के फूलों से बने प्राकृतिक रंगों का चलन तेजी से बढ़ रहा है।
परंपरा और विज्ञान: क्यों खास है टेसू का रंग?
प्राचीन काल से ही भारत में होली खेलने के लिए पलाश के फूलों का उपयोग होता आया है। वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो फाल्गुन मास में मौसम के बदलाव के कारण शरीर में पित्त और कफ का असंतुलन बढ़ता है। पलाश के फूलों में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं। जब इन फूलों से तैयार पानी से होली खेली जाती है, तो यह त्वचा की बीमारियों को दूर करने और शरीर की गर्मी को शांत करने में मदद करता है। आयुर्वेद में इसे ‘चर्म रोगों का काल’ माना गया है।
कैसे शुरू हुई यह परंपरा?
ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने ब्रज में गोपियों के साथ टेसू के फूलों से ही होली खेलने की शुरुआत की थी। मध्यकाल तक, शाही परिवारों से लेकर आम जनता तक, पलाश के फूलों को उबालकर केसरिया रंग तैयार करना एक सामुदायिक उत्सव का हिस्सा था। 19वीं सदी के अंत तक जब तक कृत्रिम रंगों का व्यवसायीकरण नहीं हुआ, टेसू ही होली का एकमात्र आधिकारिक रंग था।
विशेषज्ञों की राय: त्वचा के लिए वरदान
“बाजार के रंगों में मिला ‘कांच का पाउडर’ और ‘इंडस्ट्रियल डाई’ त्वचा की परतों को स्थायी रूप से नुकसान पहुँचाते हैं। इसके विपरीत, टेसू का अर्क सनबर्न से बचाता है और त्वचा को प्राकृतिक नमी प्रदान करता है। हम लोगों को घर पर ही रंग बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।” — डॉ. आर. के. शर्मा, वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ
नागरिकों के लिए सलाह: घर पर कैसे बनाएं टेसू का रंग?
प्रशासन और स्थानीय पर्यावरण समूहों ने नागरिकों के लिए कुछ सरल दिशा-निर्देश जारी किए हैं
सूखे हुए टेसू के फूलों को रात भर पानी में भिगोकर रखें।
सुबह इस पानी को उबालें जिससे गहरा नारंगी/केसरिया रंग प्राप्त होगा।
सूखी होली के लिए फूलों को सुखाकर पीस लें और इसमें थोड़ा चंदन पाउडर मिलाएं।
केमिकल युक्त ‘गुलाल’ की पहचान के लिए उसे पानी में घोलकर देखें; यदि वह नीचे बैठ जाए या अवशेष छोड़े, तो वह अशुद्ध है।



