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होर्मुज को लेकर ट्रंप का बड़ा दावा, ईरान को फिर दी धमकी, अगला निशाना कौन सा देश? ये भी बताया

वॉशिंगटन। मिडिल ईस्ट जंग अभी भी जारी है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। उन्होंने हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य को “स्ट्रेट ऑफ ट्रंप” कहकर संबोधित किया, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। ट्रंप के अनुसार, यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इस पर नियंत्रण को लेकर उनकी टिप्पणियों ने कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।

वे अमेरिका से डील के लिए गिड़गिड़ा रहे-ट्रंप
अपने बयान में उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान पर जारी संघर्ष का गंभीर प्रभाव पड़ा है और वहां की स्थिति कमजोर हुई है। ट्रंप ने कहा कि ईरान अब अमेरिका के साथ समझौते के लिए “गिड़गिड़ा रहा है”, जिससे उनकी सख्त विदेश नीति एक बार फिर सामने आई है। ट्रंप ने आगे कहा कि यदि ईरान को वैश्विक मंच पर स्थिरता चाहिए, तो उसे होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलना होगा, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम रास्ता है। उन्होंने कड़े लहजे में यह भी संकेत दिया कि अगला ध्यान क्यूबा पर हो सकता है, जिससे वैश्विक राजनीति में नए तनाव की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत अब कमजोर हो चुकी है। ट्रंप ने अपने एक और बयान में कहा कि उन्हें शांति के लिए नोबेल पुरस्कार नहीं मिला, और उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि यदि उन्हें यह सम्मान नहीं मिलता, तो भविष्य में किसी को भी नहीं मिलेगा।

ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर नहीं होगा हमला
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर संभावित हमले को फिलहाल 10 दिन के लिए स्थगित कर दिया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत इस समय काफी सकारात्मक रूप से चल रही है और ईरान के अनुरोध पर उन्होंने हमले को टालने का फैसला लिया है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि यह कदम दोनों पक्षों के लिए समय देगा ताकि कूटनीतिक समाधान खोजा जा सके और क्षेत्र में शांति कायम रहे। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह रोक केवल अस्थायी है और यह 6 अप्रैल तक लागू रहेगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य किसी भी तरह का सैन्य संघर्ष नहीं बल्कि स्थायी समाधान और क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके अलावा, ट्रंप ने यह भी कहा कि बातचीत में प्रगति हो रही है और दोनों देशों के बीच आपसी समझ और विश्वास बढ़ रहा है। इस बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ किसी भी अचानक सैन्य कार्रवाई से बचने के लिए अपने सभी रणनीतिक विकल्प तैयार रखे हैं।

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