धार्मिक

वैशाख अमावस्या की सटीक तारीख और स्नान-दान का शुभ समय, पितृ दोष के लिए करें ये उपाय

नई दिल्ली। हिंदू कैलेंडर के अनुसार वैशाख मास की अमावस्या का पितृ तर्पण और आध्यात्मिक शुद्धि के लिए विशेष महत्व है। साल 2026 में इस तिथि को लेकर पंचांग गणना के कारण लोगों में दुविधा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल और 18 अप्रैल 2026 दोनों ही दिनों के मेल से बन रही है, लेकिन उदयातिथि और अमावस्या के समाप्त होने के समय ने इसके निर्धारण को महत्वपूर्ण बना दिया है।

तारीख का संशय: 17 अप्रैल या 18 अप्रैल?
पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि की शुरुआत 17 अप्रैल 2026 को दोपहर 03:25 बजे से होगी और इसका समापन 18 अप्रैल 2026 को दोपहर 01:42 बजे होगा। शास्त्रों में ‘उदयातिथि’ (सूर्योदय के समय मौजूद तिथि) को प्राथमिकता दी जाती है। इस आधार पर, स्नान-दान और व्रत की अमावस्या 18 अप्रैल, शनिवार को मनाई जाएगी। चूंकि यह शनिवार का दिन है, इसलिए इसे ‘शनैश्चरी अमावस्या’ का विशेष संयोग भी मिल रहा है, जो पितृ दोष और शनि दोष की शांति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।

शुभ मुहूर्त और समय

धार्मिक अनुष्ठानों के लिए निम्नलिखित समय का पालन करना श्रेष्ठ रहेगा:

  • अमावस्या तिथि प्रारंभ: 17 अप्रैल 2026, दोपहर 03:25 बजे से
  • अमावस्या तिथि समाप्त: 18 अप्रैल 2026, दोपहर 01:42 बजे तक
  • ब्रह्म मुहूर्त (स्नान के लिए सर्वोत्तम): 18 अप्रैल, सुबह 04:23 से 05:07 तक
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:54 से दोपहर 12:46 तक

पितृ दोष मुक्ति के अचूक उपाय
“वैशाख अमावस्या पर पितरों के निमित्त किया गया दान और तर्पण सात पीढ़ियों तक तृप्ति प्रदान करता है। इस बार शनिवार का संयोग होने से पीपल के वृक्ष की पूजा का फल कई गुना बढ़ गया है।”
— ज्योतिषाचार्य

पितृ दोष से राहत पाने के लिए श्रद्धालु इस दिन कुछ विशेष कार्य कर सकते हैं। सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी या घर के पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें। इसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को जल अर्पित (तर्पण) करें। शनैश्चरी अमावस्या होने के कारण शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना और काले तिल का दान करना शनि की साढेसाती और ढैय्या के प्रभाव को कम करता है।

श्रद्धालुओं के लिए तैयारी और सुरक्षा
प्रशासन ने हरिद्वार, वाराणसी और प्रयागराज जैसे प्रमुख घाटों पर भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। स्थानीय निकाय चुनाव और गर्मी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए घाटों पर पेयजल और एम्बुलेंस की तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे ब्रह्म मुहूर्त में स्नान को प्राथमिकता दें ताकि दोपहर की भीषण गर्मी और भीड़ से बचा जा सके।

 

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