ग्राम गोढ़ी मे आयोजित भागवत कथा का द्वितीय दिवस हुआ पूर्ण

ग्राम गोढ़ी मे आयोजित भागवत कथा का द्वितीय दिवस हुआ पूर्ण
- ज्ञान भक्ति वैराग्य के महत्व का हुवा व्यख्यान
बिल्हा : ग्राम गोढ़ी मे आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के द्वितीय दिवस में पंड़ित चितेश्वर तिवारी द्वारा आज मुख्य रूप से भागवत महात्म्य की पूर्णता, वक्ता-श्रोता के लक्षण, नारद-व्यास संवाद, और परीक्षित जन्म की कथा सुनाई जाती है। व्यास जी द्वारा भागवत रचना की पृष्ठभूमि, भक्ति, ज्ञान व वैराग्य का महत्व, और श्रीमद्भागवत को वेदों का पका हुआ फल (निगम कल्पतरोर्गलितं फलम्) बताया जाता है।

दुतिया दिवस कथा का मुख्य सार:
भागवत महात्म्य (पूर्णता): पहले दिन से जारी महात्म्य को पूरा किया जाता है। भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के प्रसंग के माध्यम से यह समझाया जाता है कि कैसे भागवत श्रवण से जीवन में शांति और ईश्वर के प्रति समर्पण बढ़ता है।
नारद-व्यास संवाद: नारद जी द्वारा वेद व्यास जी को वेद, पुराण आदि लिखने के बाद भी आत्म-संतोष न होने पर, भागवत की रचना करने के लिए प्रेरित किया जाता है। यह कथा बताती है कि साक्षात श्री कृष्ण की लीलाओं का वर्णन ही परम कल्याणकारी है।
परीक्षित जन्म व कथा की शुरुआत: राजा परीक्षित का जन्म और उनका उत्तराधिकारी बनना। सुखदेव मुनि का आगमन और परीक्षित को कथा सुनाने की भूमिका तैयार की जाती है।
वक्ता-श्रोता के लक्षण: कथा सुनने के लिए आवश्यक योग्यता और मन की एकाग्रता पर जोर दिया जाता है।
भक्ति व ज्ञान का संदेश: कथा वाचक बताते हैं कि जब तक जीवन में ज्ञान और वैराग्य का समन्वय नहीं होता, तब तक भक्ति पूर्ण नहीं मानी जा सकती है।
द्वितीय दिवस की कथा मुख्य रूप से श्रोताओं को सात दिवसीय ज्ञान यज्ञ के लिए तैयार करती है और मन में श्रद्धा भाव जाग्रत करती है। कथा मे मुख्य यजमान परिक्षित के रूप मे रविचंद्र वर्मा और उनकी धर्मपत्नी विद्यमान है।



