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शराब घोटाला मामले में कवासी लखमा की रिहाई, कांग्रेस के बड़े नेता रहे गायब, BJP ने कसा तंज

शराब घोटाला मामले में कवासी लखमा की रिहाई, कांग्रेस के बड़े नेता रहे गायब, BJP ने कसा तंज

रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कवासी लखमा को आज रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। लखमा की रिहाई को लेकर जेल परिसर के बाहर समर्थकों और परिवारजनों में उत्साह देखने को मिला, लेकिन इस दौरान कांग्रेस के बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई।

रिहाई के समय रायपुर सेंट्रल जेल के बाहर भानुप्रतापपुर विधायक सावित्री मांडवी, पूर्व विधायक विकास उपाध्याय, कांग्रेस कार्यकर्ता और लखमा के परिवार के सदस्य मौजूद रहे। समर्थकों ने फूल-मालाओं से लखमा का स्वागत किया और नारेबाजी भी की। हालांकि, कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में से कोई भी बड़ा चेहरा इस मौके पर उपस्थित नहीं रहा।

जानकारी के अनुसार, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज रिहाई के समय रायपुर में नहीं थे और वे बालोद होते हुए बस्तर के दौरे पर रवाना हो चुके थे। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत अपने गृह क्षेत्र सक्ती में पहले से तय कार्यक्रमों में व्यस्त थे। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दिल्ली और अमृतसर के दौरे पर होने के कारण रायपुर नहीं पहुंच सके।

कांग्रेस के बड़े नेताओं की अनुपस्थिति पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा हमला बोला है। बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता अमित चिमनानी ने बयान जारी कर कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब बिट्टू बघेल जेल से रिहा हुए थे, तब कांग्रेस के बड़े नेता और स्वयं भूपेश बघेल उन्हें लेने जेल पहुंचे थे। उस समय माहौल उत्सव जैसा था और उन्हें बड़ा नेता साबित करने का प्रयास किया गया था।

अमित चिमनानी ने सवाल उठाते हुए कहा कि आज जब कवासी लखमा जेल से रिहा हुए, तो कांग्रेस का कोई भी बड़ा नेता उन्हें लेने नहीं पहुंचा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि क्या यह माना जाए कि कांग्रेस नेतृत्व को कवासी लखमा की रिहाई की कोई खुशी नहीं है। बीजेपी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कवासी लखमा एक आदिवासी नेता हैं, जिन्हें कांग्रेस ने सिर्फ मोहरे की तरह इस्तेमाल किया।

उन्होंने आगे कहा कि शराब घोटाला मामले में अब यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस ने कवासी लखमा को ढाल बनाकर पेश किया और संकट के समय पार्टी नेतृत्व ने उनसे दूरी बना ली। बीजेपी ने इसे कांग्रेस की कथनी और करनी में अंतर का उदाहरण बताया।

दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वरिष्ठ नेताओं की गैरमौजूदगी का कारण पूर्व निर्धारित कार्यक्रम थे और इसे राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, लखमा की रिहाई कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और कांग्रेस नेतृत्व आगे भी उनके साथ खड़ा रहेगा।गौरतलब है कि शराब घोटाला मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति में लंबे समय से विवाद का केंद्र बना हुआ है। इस मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और नेताओं की गिरफ्तारी ने सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक लड़ाई को जन्म दिया है।

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