विजया एकादशी 2026: 14 फरवरी को खुलेगा व्रत, नोट करें पारण का सटीक समय और पूजा नियम

धार्मिक : पंचांग गणना के अनुसार, इस वर्ष विजया एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए 14 फरवरी 2026 का दिन विशेष महत्वपूर्ण है। शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत की पूर्णता तभी मानी जाती है जब उसका पारण (व्रत खोलना) शुभ मुहूर्त के भीतर किया जाए। इस बार पारण के लिए सुबह 07:00 बजे से 09:14 बजे तक का समय सबसे उत्तम बताया गया है।
शुभ मुहूर्त और समय की गणना
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, द्वादशी तिथि के भीतर ही पारण करना अनिवार्य है। 14 फरवरी को सूर्योदय के बाद श्रद्धालुओं को 2 घंटे 14 मिनट का संक्षिप्त समय मिलेगा। धार्मिक मान्यता है कि यदि पारण समय पर न किया जाए, तो व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे सुबह 09:14 से पहले अपनी पूजा संपन्न कर व्रत खोल लें।
विजया एकादशी व्रत पारण की प्रामाणिक विधि
पारण के दिन केवल भोजन कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए विशिष्ट शास्त्रीय प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।
स्नान और संकल्प: द्वादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
देव अर्घ्य: तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल अर्पित करें।
विष्णु पूजन: भगवान विष्णु की प्रतिमा को चौकी पर विराजित करें। उन्हें पीले फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करें।
दीप और मंत्र: देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करें।
सात्विक पारण: भगवान को सात्विक भोग लगाएं। व्रत खोलने के लिए चरणामृत और तुलसी के पत्ते का प्रयोग अनिवार्य माना गया है।
दान का महत्व: धन लाभ और समृद्धि के योग
“एकादशी व्रत के पश्चात द्वादशी तिथि पर किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है। जो जातक इस दिन अन्न और धन का गुप्त दान करते हैं, उन्हें आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।” — पंडित शास्त्री, स्थानीय ज्योतिषाचार्य
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजया एकादशी का नाम ही ‘विजय’ का प्रतीक है। इस दिन दान करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि साधक के जीवन में धन लाभ के योग भी बनते हैं। ज्योतिषियों का सुझाव है कि इस दिन जरूरतमंदों को अनाज, तिल या ऊनी वस्त्रों का दान करना विशेष फलदायी रहता है।
सावधानी और विशेष निर्देश
श्रद्धालु ध्यान रखें कि पारण के दौरान तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन) का सेवन पूरी तरह वर्जित है। व्रत खोलने के बाद भी पूरे दिन सात्विकता बनाए रखना आवश्यक है। यदि आप किसी कारणवश 09:14 बजे तक पारण नहीं कर पाते हैं, तो हरि वासर समाप्त होने की प्रतीक्षा करें, हालांकि 2026 की गणना के अनुसार सुबह का समय ही सर्वश्रेष्ठ है।



