
दंतेवाड़ा : छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में आस्था और रहस्य का अनोखा संगम देखने को मिलता है। दंतेवाड़ा जिले के छिंदनार-बारसूर मार्ग से करीब 100 मीटर अंदर पहाड़ी पर स्थित मुकड़ी मावली माता मंदिर को स्थानीय लोग “प्रेम मिलाने वाली देवी” का दरबार मानते हैं। वैलेंटाइन डे पर यहां बड़ी संख्या में युवक अपनी अधूरी प्रेम कहानी पूरी होने की मन्नत लेकर पहुंचते हैं।
यहां प्रेमी अपनी प्रेमिका के साथ नहीं आते, बल्कि उसकी तस्वीर, पत्र या कोई निशानी देवी के चरणों में रखते हैं। पत्र को पत्थरों के नीचे दबाकर मन्नत मांगी जाती है और पुजारी इन वस्तुओं की रक्षा करते हैं, कोई उन्हें छू नहीं सकता। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद पर देवी बिछड़े प्रेमियों को मिला देती हैं। इस मंदिर की सबसे अलग परंपरा यही है कि यहां केवल प्रेमी युवक ही प्रवेश कर सकते हैं, जबकि लड़कियों और महिलाओं का आना प्रतिबंधित माना जाता है। ग्रामीणों के अनुसार यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है।
बस्तर के गांवों के अलावा महाराष्ट्र सहित कई राज्यों से लोग यहां पहुंचते हैं। कई युवाओं का दावा है कि मन्नत मांगने के बाद उनका प्रेम विवाह सफल हुआ। मन्नत पूरी होने पर वे दोबारा चढ़ावा चढ़ाने लौटते हैं। इसलिए मंदिर को स्थानीय लोग “लव देवी का दरबार” भी कहते हैं। मंदिर मुख्य सड़क से करीब 100 मीटर अंदर चट्टानों के ऊपर स्थित है। पत्थरों का छोटा गर्भगृह चार पिलर के सहारे बना है और मंदिर 24 घंटे खुला रहता है। छिंदनार का पुजारी परिवार पीढ़ियों से यहां पूजा करता आ रहा है।
दंतेवाड़ा से हिरानार, कासोली और छिंदनार होते हुए बारसूर रोड पर पहुंचा जा सकता है। बारसूर से करीब 9 किलोमीटर दूरी पर पहाड़ी चढ़कर मंदिर तक जाना पड़ता है। स्थानीय विश्वास है कि दिल साफ और प्रेम सच्चा हो तो मुकड़ी मावली माता किसी को खाली हाथ नहीं लौटातीं।



