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डिजिटल इंडिया का नया अवतार: अब बिना इंटरनेट के भी होगा UPI पेमेंट, NPCI की ऑफलाइन सेवा ने खत्म की कैश की टेंशन

नई दिल्ली : भारत में डिजिटल क्रांति ने खरीदारी और मोबाइल रिचार्ज के तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। लेकिन अक्सर खराब नेटवर्क या डेटा खत्म होने पर यूजर्स को पेमेंट करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस समस्या का समाधान करते हुए National Payments Corporation of India (NPCI) ने ऑफलाइन पेमेंट की सुविधा को और अधिक सुलभ बना दिया है। साल 2022 में शुरू हुई यह सेवा अब सुदूर ग्रामीण इलाकों और ‘डार्क ज़ोन’ (बिना नेटवर्क वाले क्षेत्र) में रहने वाले लोगों के लिए लाइफलाइन साबित हो रही है।

इंटरनेट नहीं तो भी नहीं रुकेगा काम: जानें कैसे काम करती है तकनीक

ऑनलाइन पेमेंट के लिए हम आमतौर पर Google Pay, Paytm और BHIM जैसे ऐप्स पर निर्भर रहते हैं, जिन्हें सक्रिय इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता होती है। हालांकि, NPCI की ऑफलाइन सुविधा *99# (USSD) कोड और UPI Lite के माध्यम से काम करती है। यह तकनीक विशेष रूप से उन स्थितियों के लिए डिज़ाइन की गई है जहाँ यूजर के पास स्मार्टफोन तो है लेकिन डेटा कनेक्टिविटी शून्य है। इसके अलावा, फीचर फोन (बटन वाले फोन) यूजर्स भी इस सेवा का लाभ उठा रहे हैं, जिससे बैंकों के चक्कर काटने और बार-बार ATM से कैश निकालने की मजबूरी खत्म हो गई है।

अधिकारियों और विशेषज्ञों की राय

“ऑफलाइन पेमेंट का मुख्य उद्देश्य डिजिटल गैप को भरना है। 2022 में इसकी शुरुआत के बाद से, हमने छोटे ट्रांजैक्शन के लिए UPI Lite के प्रति लोगों का जबरदस्त रुझान देखा है, जो बिना पिन और बिना इंटरनेट के भी प्रोसेस हो सकता है।” — डिजिटल बैंकिंग एक्सपर्ट, NPCI विंग

आम नागरिकों पर प्रभाव और भविष्य की राह

इस सुविधा का सबसे बड़ा प्रभाव उन व्यापारियों और ग्राहकों पर पड़ा है जो बेसमेंट की दुकानों या पहाड़ी क्षेत्रों में व्यापार करते हैं। UPI Lite के जरिए अब 500 रुपये तक का भुगतान बिना इंटरनेट के तुरंत किया जा सकता है। इसके लिए यूजर को बस अपने वॉलेट में पहले से पैसे लोड करने होते हैं। प्रशासन अब इस तकनीक को और अधिक प्रमोट कर रहा है ताकि इमरजेंसी की स्थिति में, जैसे कि प्राकृतिक आपदा या नेटवर्क ब्लैकआउट के दौरान, वित्तीय लेनदेन ठप न हो।

आने वाले समय में, NPCI इस सेवा में ‘वॉइस-बेस्ड’ पेमेंट फीचर्स को भी जोड़ने की योजना बना रहा है, जिससे साक्षरता की बाधा को पार कर ग्रामीण भारत को पूरी तरह कैशलेस बनाया जा सके।

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